UPSC में शामिल होने की योजना Plan ‘A’ था और मैं Plan ‘B’ के साथ भी तैयार था; सौभाग्य से मेरी मेरी पहली योजना ही काम कर गई - शुभम गुप्ता (AIR 6; CSE 2018)

दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स (दिल्ली विश्वविद्यालय) से एक अर्थशास्त्र स्नातक शुभम गुप्ता ने वर्ष 2015 में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और अपने दूसरे प्रयास में उन्हें CSE 2016 क्रैक करने में सफलता मिली और रैंक 366वाँ रैंक प्राप्त हुआ जसके द्वारा उन्हें भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा (Indian Audit and Accounts Service) में चयन मिला.

यह शुभम का चौथा प्रयास था जिसमें वह अपना लक्ष्य पूर कर सके और मैरिट-लिस्ट में छठे स्थान पर चयन के साथ IAS का पद सुनिश्चित किया.

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एक नये स्नातक के लिए IAS बनने का ज़ुनून इतना मजबूत होता है कि पात्रता पाने के तुरंत बाद सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के उत्साह का विरोध करना कठिन होता है.

शुभम गुप्ता (AIR 6; CSE 2018) ने भी स्नातक के तुरन्त बाद अपना पहला प्रयास लेने की सोच बनाई तो यह कोई अपवाद नहीं है. इसके अलावा, IAS बनना तो शुभम का बचपन का सपना था. जब वह छोटे थे, शायद 5 वीं कक्षा में पढ़ते थे, तो उनके पिता ने कहा कि वह उन्हें एक आई.ए.एस. अधिकारी बनना चाहते हैं.

शुभम के लिए, 'सिविल सेवाओं' में कैरियर चुनने का एक और कारण था कि वह हमेशा एक ऐसा जीवन चाहते थे, जहाँ वह लोगों की भलाई के लिए काम कर सकें और उपलब्ध विकल्पों की खोज करने के बाद, उन्हें यह समझ आ गया कि यह सबसे आसान और प्रत्यक्ष तरीका है जिसमें वह इसप्रकार के कार्य सबसे कुशल तरीके से कर सकते हैं.

शुभम के लिए सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना एक सुनियोजित रणनीति रही. अपनी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए शुभम ने कहा, "सबसे अप्रत्याशित परीक्षा होने के नाते, इससे पहले कि मैं प्रयास लेने का फैसला करता, मुझे अपनी चीजों को सुरक्षित करने की आवश्यकता थी."SHUBHAM-GUPTA-IAS-Topper-CSE-2018-Rank-6

इसलिए सबसे पहले, मैंने एक बैक-अप योजना दिमाग में रखी जो हमेशा मुझे सुरक्षा की भावना देती रहे.

स्नातक बनने के बाद, मैंने तुरंत तैयारी शुरू कर दी और उसी समय, मैंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में दाखिला भी लिया. वास्तव में दूसरे प्रयास में, जब मैं पास हुआ, मेरे हाथ में दो प्लेसमेंट ऑफर थे; एक, PWC से और दूसरा, डेलॉइट से.

मैं भाग्य पर कुछ भी नहीं छोड़ना चाहता था. इस चीज ने मुझे बहुत मदद की. आमतौर पर उम्मीदवारों के पास जब आपके हाथ में बैक-अप योजना नहीं होती है, तो असुरक्षा की भावना घर कर जाती है जिसका प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.

मेरे सामने ऐसी कोई चीज़ नहीं थी जिससे मुझमें किसी प्रकार का डर या संशय उत्पन्न हो जिसके फलस्वरूप मैं सिर्फ अपनी योजना पर ध्यान केंद्रित कर सका.

बैक-अप योजना के साथ; मैं पूरी तरह से यू.पी.एस.सी. पर निर्भर नहीं था.

लेकिन, 'सिविल सेवाओं' के लिए मेरी चाहत इतनी मजबूत थी कि मेरे मन में हमेशा यह बात थी कि अगर किसी भी स्थिति में मुझे Plan ‘B’ के लिए जाना पड़े; फिर भी, मैं किसी समय Plan ‘A’ पर वापस आऊंगा.

माता-पिता के आशीर्वाद से, मेरा Plan ‘A’ काम कर गया और सफलता की राह मिल गई.

इसी तरह, जब मैंने तैयारी की शुरूआत की, तो मैंने अपने प्रयास के लिए भी योजना बनाई और वैकल्पिक विषय चुनने पर भी थोड़ा काम किया.

मुझे हमेशा विधि (Law) का अध्ययन करने में दिलचस्पी रही; इसने मैंने इसे वैकल्पिक विषय के रूप में चुना.

बिना लॉ की पृष्ठभूमि के छात्र के लिए, लॉ को समझना मुश्किल सा लगता है; लेकिन, हाल के वर्षों में मैंने कई ऐसे उदाहरण देखे हैं, जहां बिना लॉ की पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों ने वैकल्पिक विषय के रूप में लॉ के साथ शानदार प्रदर्शन किया और शीर्ष रैंक हासिल की.

सौभाग्य से, तैयारी के लिए मुझे निर्वाणा IAS से जो मार्गदर्शन मिला, उसने मुझे आवश्यकताओं को अच्छे तरीके से समझने में मदद की जिसने मुझे अपने दूसरे प्रयास में CSE 2016 में सफलता प्राप्त करने में मदद की.

सफलता मिली पर अधूरी; लक्ष्य पाने की कसक मन में बनी रही

मैं खुश था कि मैं कुछ प्राप्त करने में सक्षम रहा, हालांकि मैं रैंक से संतुष्ट नहीं था; इसलिए, मेरी कोशिश जारी रही तो इसका कारण मेरा परिवार है.

अपनी पिछली सफलता के बारे में खुलकर बात करते हुए शुभम ने कहा, "मैं एक बड़े, विस्तारित व्यवसायी परिवार से हूं, फिर भी, परिवार में ऐसे बहुत से लोग हैं जो Indian Audit and Accounts Service (भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा) के बारे में जानते ही नहीं थे.SHUBHAM-GUPTA-IAS-Topper-CSE-2018-Rank-6

उस संदर्भ में मेरी यह उपलब्धि मुझे वह खुशी न दिला सकी जो मैं अपने परिवार की आँखों में देखना चाहता था. वहां ऐसी कोई अनुभूति दिखाई नहीं दे रही थी; इसलिए, कुछ कमी का एहसास मेरे अंदर भी जागा और इसने मुझे एक और कोशिश करने को प्रेरित किया.

अपने तीसरे प्रयास CSE 2017 की निराशा के बाद भी मैं अपने चौथे प्रयास के लिए तैयारी करता रहा.

इस समय शिमला में मेरा प्रशिक्षण चल रहा है और सच में मेरे पास इस समय का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला.

मैं शाम को 5 बजे फ्री हो जाता था और फिर, मैं कुछ समय के लिए खेलता था. अध्ययन के लिए दिन में केवल 2-3 घंटे मिल पाते थे.

इसलिए, जिस चीज ने मुझे सबसे अधिक सहायता की वह था मेरी तैयारी के पिछले अनुभव और शायद, मैं अपनी गलतियों का विश्लेषण करने में सक्षम रहा.

मैं पाठ्येतर गतिविधियों और अध्ययन-योजना के बीच संतुलन बनाए रखने में सक्षम रहा. अन्य कारक यह है कि मेरा लेखन कौशल ठीक है जिसने मुझे बहुत मदद की.

सच कहूँ तो, इन सभी चीजों ने मुझे थोड़ा आत्मविश्वास दिया और इस आधार पर आगे बढ़ने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की संरचना करने में सक्षम रहा और आखिरकार, इस चौथे प्रयास ने मुझे मेरी मंजिल तक पहुँचने में मदद की.

इस प्रयास के लिए, मेरी तैयारी समाचार-पत्रों पर आधारित रही और मैंने अपने पिछले प्रयासों के दौरान जो बहुत सारे संकलन किए थे, उनका उपयोग किया. समय की कमी ने मुझे अपने पिछले प्रयासों में मेरे लिए व्यवस्थित अध्ययन-सामग्री पर भरोसा करने के लिए मजबूर किया. लेकिन, मेरे सभी प्रयासों में समाचार-पत्र हमेशा अहम रहे हैं.

इस बार काम करने वाले कारकों का खुलासा करते हुए शुभम ने कहा, “मेरी पिछली सफलता में, मुझे साक्षात्कार में सिर्फ 124 अंक मिले थे. इससे उस समय मेरी रैंक पर असर पड़ा; लेकिन, उसका सकारात्मक पहलु देखते हुए उस साक्षात्कार ने मुझे व्यक्तित्व परीक्षण के बारे में मूल्यवान जानकारियाँ दी और बारीकियों को समझने में मदद दी.

इस प्रयास में मुझे समझ थी कि क्या करना है और क्या नहीं. मैंने अपने आप को सही किया - अपने आप को कैसे व्यक्त किया जाए, एक अच्छा निर्णय लेने हेतु अंतर्दृष्टि मिली कि कहां क्या कहना है और कहां क्या नहीं कहना है, और साक्षात्कार के दौरान शांत चित रख इन 20-25 मिनटों को कैसे संभालना है.

मैंने थोड़ा विश्लेषण किया और जब मुझे पता लगा कि मैंने मुख्य परीक्षा पास कर ली है और मुझे फिर से साक्षात्कार बोर्ड का सामना करना पड़ता है, तो मैं इसके बारे में ईमानदार था.

अपनी सफलता के रहस्य को उजागर करते हुए शुभम ने कहा, "इसका श्रेय पूर्णतः मेरे मेरे माता-पिता को है जिनकी वजह से मैं यह कर सका."SHUBHAM-GUPTA-IAS-Topper-CSE-2018-Rank-6

हमारा एक संयुक्त परिवार हैं; मेरे पिता रियल एस्टेट में हैं. वह एक बिल्डर है. मेरी माँ एक गृहिणी हैं और मेरा भाई सिविल इंजीनियर है और मेरे पिता के साथ रियल एस्टेट कारोबार में है. मेरी भाभी भी गृहिणी हैं. मेरी बहन एक चार्टर्ड एकाउंटेंट है और बहनोई नमक के व्यवसाय में हैं.

मेरे माता-पिता हमेशा सहायक रहे हैं और अगर मुझे इस सफलता का श्रेय देना है, तो मेरे माता-पिता और परिवार इसके सबसे ज्यादा हकदार हैं.

Last Update Thursday 8th August 2019     

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