टॉपर की प्रेरणा और उनके सुझावों से प्रिन्स धवन को मिली मदद, किया प्राप्त सिविल सेवा परीक्षा 2011 में तीसरा रैंक

जब यह आपके वैकल्पिक विषय की पसंद और चुनाव के बारे में होता है, तो कुछ मूल्यवान सलाह लेने के इरादे से आपके द्वारा चयनित वैकल्पिक विषय हेतु सहायता के लिए सफल उम्मीदवारों तक पहुंचने में कोई बुराई नहीं है.

ऐसा ही कुछ हुआ प्रिंस धवन (AIR 3; CSE 2011) के साथ जब अपनी तैयारी की योजना बनाते समय वैकल्पिक विषय के चुनाव के बारे में और तैयारी की रणनीति हेतु सही निर्णय लेने में वरिष्ठ, सफल उम्मीदवारों तक पहुँचे जिन्होंने प्रिंस को उचित मार्गदर्शन दिया.

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किसी अभियान में चीजों को सही राह पर बनाये रखने के लिए कल्पनाओं और सफलता हेतु उसे पाने की तीव्र इच्छा की आवश्यकता होती है. सफलता के रहस्यों में से एक यह है कि आप समझें अपनी इन कल्पनाओं को साकार करने हेतु प्रेरणा का अनुसरण कर योजना के अनुसार कार्यान्वन ही आपको गंतव्य तक ले जा सकता है.

सिविल सेवा में अपना करियर बनाने के बारे में सोचना शुरू कर रहे किसी भी नए उम्मीदवार के लिए सफल उम्मीदवारों की रणनीतियों पर एक नज़र डालने और उनकी सफलता-योजना से कुछ सुराग लेने के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है.

अधिकाँश अभ्यर्थी वैसे भी शीर्ष रैंक पर सफल उम्मीदवारों के विचारों को जानने के लिए उत्सुक रहते हैं और उनकी अभिव्यक्ति और सलाह के आधार पर वे तैयारी के लगभग अधिकांश मुद्दों पर के बारे में अपनी सोच बनाते हैं जैसे कि क्या पढ़ना है, उनकी रणनीति क्या थी; वैकल्पिक विषय क्या रहे, कोचिंग संस्थान जहाँ से उन्होंने मदद ली, आदि.

जब प्रिंस धवन ने सिविल सेवा परीक्षा के लिए गंभीर तैयारी के विचार के साथ शुरूआत की तो वे अपने वैकल्पिक विषयों के बारे में थोड़ा भ्रमित थे और मानविकी विषयों पर विचार कर रहे थे जो बहुत अच्छे परिणाम दे रहे थे.

इन विचार में मुख्य पहलू और विचारणीय तथ्य यह था कि अधिकांश मानविकी विषयों की तैयारी लगभग 4-5 महीनों के भीतर की जा सकती है जबकि अपने विषय इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को प्रभावी रूप से तैयार करने के लिए कम से कम एक वर्ष का समय चाहिए.Prince-Dhawan-IAS-Topper-3rd-rank-cse-2011

प्रिंस के लिए, यह सिविल सेवा परीक्षा का पहला प्रयास था और अपने विषय इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के लिए लगाव आवेगी था; लेकिन, थोड़ी समस्या थी, कुछ प्रश्न थे जिनका समाधान ज़रूरी था और इससे पहले कि वह हाँ कह सके, प्रिंस अपने फैसले के बारे में सुनिश्चित होना चाहता था.

प्रिंस के लिए दुविधा एक वैकल्पिक विषय के रूप में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग चुनने के बारे में थी क्योंकि इस विषय में बहुत अच्छी सफलता-दर नहीं है और जैसा कि सीमित संख्या में उम्मीदवारों द्वारा चुना जाता है, इसलिए वह इसे लें या कोई और विषय.

इस मोर्चे पर, सबसे बड़ी प्रेरणा उन्हें वरिष्ठ सफल उम्मीदवार प्रकाश राजपुरोहित (AIR 2, CSE 2009) से मिली जिन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और गणित के साथ उच्च सफलता प्राप्त की.

प्रिंस ने अन्य वरिष्ठों मुथेला राजू रेवु (AIR 1, CSE 2006) एवं सुप्रीत सिंह गुलाटी (AIR 2, CSE 2007) की सफलता पर भी नज़र बनाये रखी जिन्होंने वैकल्पिक विषय इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के साथ सफलता हासिल की थी.

अपने निर्णय के बारे में जिक्र करते हुए प्रिंस ने बताया, "प्रकाश सर से बात करने के बाद, मैंने अपनी सोच के अनुसार इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को पहली पसंद के रूप में स्वीकार करने का मन बना लिया और अपने दूसरे वैकल्पिक का चयन करते समय, मैंने सुप्रीत गुलाटी सर की सलाह मानी, जिन्होंने दोनों वैकल्पिक विषय विज्ञान/इंजीनियरिंग से संबद्ध न लेने की सलाह दी."

"इसी को ध्यान में रखते हुए  दूसरे वैकल्पिक विषय के लिए, मैंने इन दिनों सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विषय - लोक प्रशासन को प्राथमिकता दी."

अंततः यह रणनीति कारगर सिद्ध हुई, उचित मार्गदर्शन प्रिंस के लिए सफलता का एक साधन साबित हुआ जिसके साथ उन्हें अपने पहले ही प्रयास में ही वांच्छित सफलता मिल गई.

इसलिए किसी संशय की स्थिति में उन लोगों तक पहुंचें, जिन पर आप भरोसा करते हैं, जो आपको सही दिशा दिखा सकते हैं.

सही मार्गदर्शन के साथ कड़ी मेहनत करते रहें और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहें, ईश्वर की इच्छा रही तो सफलता आपकी ही होगी.

Last Update Tuesday 6th August 2019     

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