योजनाबद्ध कड़ी मेहनत और तैयारी में निरन्तरता के साथ हरियाणा की अंकिता चौधरी ने सिविल सेवा परीक्षा 2018 में प्राप्त की 14वीं रैंक

मेहम, रोहतक (हरियाणा) की अंकिता चौधरी ने सिविल सेवा परीक्षा 2018 में 14 वीं रैंक प्राप्त कर एक शानदार सफलता दर्ज की है.

यह अंकिता का दूसरा प्रयास था और वैकल्पिक विषय के रूप में उन्होंने लोक प्रशासन का चयन किया था.

अंकिता का परीक्षा लेखन माध्यम अंग्रेजी था.

 

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“अध्ययन के लिए छोटे लक्ष्य सूचीबद्ध करना और दैनिक-आधार पर इन्हें पूरा करना; सभी लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयोजन और कड़ी मेहनत कर इन्हें योजना के अनुरूप खुद की समय-सीमा तय में पूरा करने की कोशिश करना” इन शब्दों के साथ अंकिता चौधरी (रैंक 14; सिविल सेवा परीक्षा 2018) अपनी सफलता-योजना को परिभाषित करती हैं.

यू.पी.एस.सी. के बारे में अपने मन की बात को सरलता से व्यक्त करते हुए अंकिता ने बताया, “सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का कोई आदर्श तरीका नहीं है; लेकिन, मैंने अपनी सहज प्रवृत्ति पर भरोसा किया और इस तैयारी को दृढ़ संकल्प और जुनून के साथ आगे बढ़ाया.”

अंकिता ने अपने लक्ष्य-निर्धारण की योजनाओं की ओर संकेत देते हुए कहा, “अपने स्कूली दिनों के दौरान ही मैंने सिविल सेवाओं में करियर बनाने का मन बना लिया था; मेरा भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के प्रति एक स्पष्ट झुकाव शुरू से ही रहा है. शुरू में मैंने आई.ए.एस. के अलावा कुछ और चुनने का सोचा भी नहीं था. जब भी किसी ने पूँछा, मैंने यह भी नहीं कहा कि मैं यू.पी.एस.सी. सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हूं; बल्कि मैं कहती थी कि मैं IAS की तैयारी कर रही हूँ.”ankita-choudhary-ias-topper-14th-rank-cse-2018

अपने स्कूल के दिनों में, प्रेरित होने के लिए मैं टॉपर्स के इंटरव्यू बहुत पढ़ती थी. शुरू में ही लक्ष्य निर्धारण ने मुझे पूर्ववर्ती कार्यों का परिपालन करने में मदद की जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय (हिंदू कॉलेज) से स्नातक (रसायन विज्ञान ऑनर्स) और आई.आई.टी. (दिल्ली) से पोस्ट-ग्रेजुएशन शामिल रहा. क्योंकि मेरी आयु 21 वर्ष की पूरी नहीं थी और परीक्षा लिखने के योग्य भी नहीं थी. इस कारण सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने से पहले परिपक्वता हेतु यह मेरी योजना का हिस्सा रहा.

जब मैं आई.आई.टी. दिल्ली में थी, मेरी रूम-मेट भी अपनी पीएच.डी. के दौरान सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही थी, उन्होंने मुझे परीक्षा के बारे में और यहां तक ​​कि कोचिंग संस्थानों के बारे में मोटे-तौर पर विचार दिया. इसके अलावा, मेरे 2-3 चचेरे भाई भी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. उन्होंने मुझे वैकल्पिक विषय चुनने में मदद की. इन सब सूचनाओं के आधार पर बाकी निर्णय मैंने खुद किये.

अब, परीक्षा-योजना के अनुसार मुझे केवल एक वैकल्पिक विषय चुनना था और तर्क के कई पक्षों के मूल्यांकन के बाद मैंने लोक प्रशासन, एक ऐसा विषय जो मेरे भविष्य के प्रयास में भी मेरी मदद करेगा, के पक्ष में निर्णय लिया.

मैंने सामान्य अध्ययन की तैयारी के लिए वाजी राम और रवि कोचिंग संस्थान से सहायता प्राप्त की और लोक प्रशासन के लिए सिनर्जी आई.ए.एस. का चयन किया. जब आप किसी कोचिंग से जुड़ते हैं तो जल्द ही आप एक समूह का हिस्सा बन जाते हैं और सिविल सेवा परीक्षा तैयारी की बाकी जानकारियाँ आपको बस खुद ही विकसित करनी होती हैं.

जब मैंने तैयारी शुरू की मैंने सोशल मीडिया का सीमित उपयोग किया और जब भी इंटरनेट का उपयोग किया वह पाठ्य-सामग्री और सिर्फ अपनी तैयारी तक ही सीमित रहा.

यहां तक ​​कि, मैंने टॉपर्स की रणनीतियों के बारे में बहुत कुछ नहीं पढ़ा क्योंकि कभी-कभी जब आप बहुत जांच करते हैं, सफल उम्मीदवारों के अनुभवों में से बारीकियाँ खोजने में लग जाते हैं तो कभी-कभी आप खुद पर संदेह करना शुरू कर देते हैं.

अपनी वैकल्पिक विषय पसंद के बारे में भी मैंने वर्तमान रुझानों को देखा तक नहीं और उन सभी बातों को अनसुना किया जो सब लोग लोक प्रशासन के हाल के प्रदर्शन के बारे में बात कर रहे थे.ankita-choudhary-ias-topper-14th-rank-cse-2018

आरम्भ से ही मैं बहुत स्पष्ट थी कि मैं केवल यू.पी.एस.सी. से ही जुड़ी रहूंगी; लेकिन, तैयारी के दौरान मैंने महसूस किया कि यह एक अप्रत्याशित परीक्षा है और आप इस बारे में सुनिश्चित नहीं हो सकते कि आप इसके माध्यम से कब सफलता प्राप्त करेंगे.

जब मैंने अपना पहले प्रयास सिविल सेवा परीक्षा 2017 में लिया, दरअसल मैंने सामान्य अध्ययन हेतु अपनी कोचिंग समाप्त की ही थी, इसलिए स्वाध्याय के लिए और नोट्स को संशोधित करने के लिए कोई समय नहीं मिला. इसलिए, मुझे लगता है कि मेरे पहले प्रयास के दौरान, मेरी गलती थी कि मैं विषय-वस्तु के लिए आपेक्षित गहराई तक नहीं जा सकी. परिणामस्वरूप, मैं प्रारंभिक परीक्षा को पार नहीं कर सकी.

इसलिए, जब मैं अपने पहले प्रयास में असफल रही, तो मैंने अन्य विकल्पों के बारे में सोचा और मैंने अन्य परीक्षाओं के लिए भी पेपर दिए. जैसा कि नियति का खेल है, जिस समय यह सिविल सेवा परीक्षा 2018 का परिणाम निकला, मेरे पास पहले से ही दो नौकरियां थीं; लेकिन, मैंने उनमें से किसी को भी ज्वॉइन नहीं किया.

प्रीलिम्स 2017 के बाद के गैप के दौरान मैंने यह सुनिश्चित किया कि मैं अपने नोट्स को अच्छी तरह से संशोधित करूं. उपलब्ध पाठ्य-सामग्री के आधार पर मैंने अपने नोट्स तैयार किए, उन्हें अपडेट किया और कई बार संशोधित किया और इस प्रक्रिया में मैंने अधिक स्रोतों का उल्लेख नहीं किया. मैं किस विषय का अध्ययन कहाँ से करने जा रही हूँ, इसके बारे में मैं बहुत सतर्क थी और इस चीज ने मेरी बहुत मदद की.

मेरे स्पष्ट दृष्टिकोण और संतुलित सोच ने मुझे मेरी मंजिल तक पहुँचने में मदद की.

जब आप सिविल सेवा परीक्षा की तैयार करते हैं यह चरण प्रायः एक निराशाजनक स्थिति से भरा रहता है; यहां तक ​​कि मैं अपनी तैयारी के दौरान रोयी भी हूं. जब आप 10-12 घंटे अध्ययन करते हैं और अपने दोस्तों को आनंद लेते हुए देखते हैं, तो आपको लगता है कि मैं कहाँ फंस गया हूँ; लेकिन, मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे केवल दो प्रयासों में सफलता मिल गई.

अपने साक्षात्कार के बाद मैं संतुष्ट थी और सफलता की आशा कर रही थी पर उच्च रैंक के बारे में विचार नहीं आया. मैंने अपने परिवार को बताया कि इस वर्ष मैं शायद आई.आर.एस. बन जाऊंगा और अगले वर्ष, और अधिक प्रयास के साथ निश्चित रूप से मैं एक आई.ए.एस. बन जाऊंगी.

हालांकि, मेरे पिता और भाई काफी आश्वस्त थे और परिणाम से पहले के दिनों में वे कह रहे थे कि आप शीर्ष 20 में होंगी और मेरे भाई ने तो कहा था कि आपको शीर्ष 10 में होना चाहिए.

अपना परिणाम जानने के बाद, सबसे पहले यह एक अविश्वास की भावना रही. मैं रैंक 14 पर अपना नाम देखकर चौंक गई थी और फिर, उस क्षण के बाद जब जश्न शुरू हुआ, मुझे इस उपलब्धि का एहसास हुआ और संतोष हुआ कि यह वास्तव में मैं सही दिशा में कार्य कर रही थी.

मुझे लगता है कि मेरी सफलता में मेरे परिवार का सबसे बड़ा योगदान है. मेरी तैयारी के दौरान उनका समर्थन इस सफलता का आधार रहा है. मेरे पिता रोहतक में एक सरकारी चीनी मिल में रिकॉर्ड कीपर के रूप में काम करते हैं. मेरी माँ एक सरकारी शिक्षक थीं; एक सड़क दुर्घटना में वर्ष 2012 में उनका निधन हो गया. मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि मेरे बड़े भाई ने वास्तव में मेरे लिए अपनी पढ़ाई का त्याग किया. उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय शुरू किया; वह शादीशुदा है और हमारे घर में दो छोटे बच्चे हैं.ankita-choudhary-ias-topper-14th-rank-cse-2018

मुझे अपने ऊपर बहुत भरोसा था; लेकिन, फिर भी यह बहुत महत्वपूर्ण था कि कोई व्यक्ति यह कहे कि 'हाँ, आप यह कर सकते हैं'. इसलिए, मेरे लिए यह बहुत महत्वपूर्ण था कि मेरे पास मेरा समर्थन करने के लिए कोई है और मेरे पिता और भाई हमेशा मेरे लिए यह बताने के लिए मेरे साथ थे कि आप एक कदम आगे बढ़ाएं, हम आपके पीछे हैं.

भविष्य की परीक्षाओं में शामिल होने की आकांक्षा भरे उम्मीदवारों को सलाह देते हुए अंकिता ने कहा कि आप अपने प्रयास की ठोस योजना बनाएं, कड़ी मेहनत करें और बस तैयारी में निरंतरता बनाए रखें.

सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ, आप भी बड़ी सफलता प्राप्त कर सकते हैं.

Last Update Friday 19th July 2019     

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