असफलताओं को मुस्कुराहट के साथ स्वीकार करने और गलतियों से सीखने से राह आसान हो गई - मयंक गुप्ता (AIR 177; CSE 2018)

अलवर, राजस्थान के डॉ. मयंक गुप्ता की सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता उनकी कड़ी मेहनत और धैर्य का पुरस्कार है. उन्होंने इस प्रयास में 177 वीं रैंक हासिल की.

इसके लिए हालांकि उन्हें थोड़ी लम्बा इंतजार करना पड़ा क्योंकि यह सफलता उन्हें अपने पांचवें प्रयास में प्राप्त हुई.

परीक्षा लेखन के लिए उनका माध्यम अंग्रेजी रहा परन्तु, साक्षात्कार के लिए मयंक ने हिन्दी भाषा को चुना.

उन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में अपना विषय चिकित्सा विज्ञान चुना था.

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हम अपना भाग्य स्वयं लिखते हैं; हमें आवश्यकता है तो बस अपनी क्षमताओं पर और स्वयं पर विश्वास रखने की, यदि ऐसा है तो लगभग सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं.

सफलता की मिठास का स्वाद चखने से पहले मयंक गुप्ता (AIR 177; CSE 2018) को एक लंबा इंतजार करना पड़ा.

शुरू में जब मयंक ने सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने का मन बनाया, तो एक परम्परागत शैती का अनुकरण रहा; और जैसा अकसर हम देखने हैं उनकी शुरूआत उत्साह और उत्तेजना के साथ और चीजें तेज गति से आरम्भ हुई. जल्द ही, उनका वास्तविकताओं के साथ सामना हुआ और चीजें थोड़ी धीमी हो गईं.

अपनी तैयारी-यात्रा की व्याख्या करते हुए मयंक ने कहा, “कभी-कभी यह परीक्षा की अप्रत्याशित प्रकृति होती है जो आपको रोक देती है; तो कभी-कभी यह आपके खुद के व्यवहार की अनिश्चितता होती है जो आपको निराश करती है. हालांकि, सफलता की उम्मीद हमें फिर से कोशिश करने का एक कारण देती है.”Mayank-Gupta-ias-upsc-topper-cse-2108-177th-rank

“यह सफलता मुझे पाँचवें प्रयास में मिली. मैं पहले प्रयास में CSE 2014 में मुख्य परीक्षा तक पहुँचा, CSE 2015 और 2016 के प्रयासों में मैं प्रीलिम्स पास नहीं कर सका; फिर CSE 2017 में मुख्य परीक्षा तक पहुँच सका, पर आगे न बढ़ सका.

आखिरकार CSE 2018 में अंततः मैंने इसमें सफलता प्राप्त की और 177 वां रैंक प्राप्त किया.

 "जब आप मुश्किल समय का सामना करते हैं, तो जानिए कि चुनौतियाँ आपको नष्ट करने के लिए नहीं हैं"

अपने मामले में मैं इन शब्दों को बिलकुल सटीक मानता हूं और अपनी इस सोच के कारण ही अपने प्रयास को सही आकार देने सक्षम रह सका.Mayank-Gupta-ias-upsc-topper-cse-2108-177th-rank

चार साल की कोशिश और असफलता; लेकिन, मेरे लिए, मेरे सभी पिछले प्रयासों ने वर्तमान उपलब्धि के लिए कदम बढ़ाने के रूप में काम किया. मैंने अपने हर प्रयास में अपना 100% दिया, कभी न कभी परीक्षा के हर चरण में असफल रहा. फिर भी, मैं कोशिश करता रहा और इस प्रक्रिया में, मैं अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहने के लिए सभी उतार-चढ़ाव का डट कर सामना करता रहा.

मैंने अपनी गलतियों से सीखा और आखिरकार लंबे समय से प्रतीक्षित सफलता मैंने अपने पांचवें प्रयास में प्राप्त की.

सिविल सेवा में कैरियर की ओर कैसे आकर्षित हुए, इस पर टिप्पणी करते हुए मयंक ने कहा, “समाज पर सिविल सेवाओं के प्रभाव का स्तर किसी भी अन्य नौकरी या सेवा की तुलना में अधिक है. इसके अतिरिक्त, इन सेवाओं की प्रकृति स्वयं चुनौतीपूर्ण है और इन्हें समाज में अत्यधिक सम्मान मिलता है जो व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों तरह की संतुष्टि प्रदान करता है.

अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने परिवार को देते हुए और उनके योगदान को स्वीकार करते हुए मयंक ने कहा, “मेरे पिता श्री अनिल कुमार गुप्ता राजस्थान विद्युत प्रसार निगम में सहायक अभियंता हैं. मेरी माँ श्रीमती. मंजू गुप्ता गृहिणी हैं. मेरे भाई डॉ. पंकज गुप्ता भी एक डॉक्टर हैं और वर्तमान में वडोदरा के GMERS से पेडियाट्रिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं. मेरे परिवार के सभी सदस्यों ने मेरे सपनों, निर्णयों, कार्यों और प्रयासों में अपना पूरा भरोसा दिखाया और विश्वास बनाये रखा. मेरे कठिन समय और कई विफलताओं के दौरान इन सभी का समर्थन मेरा मनोबल बढ़ाने में और प्रयास जारी रखने का प्रमुख स्रोत रहा.”Mayank-Gupta-ias-upsc-topper-cse-2108-177th-rank

तैयारी योजना के बारे में सही सलाह मयंक को अपने वरिष्ठ और संरक्षक डॉ. पुष्पेंद्र पुनिया आई.आर.एस. और मित्र डॉ. राजेश सामोटा से मिली. इसके अलावा, उन्होंने उपयुक्त जानकारियों के लिए के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया. तैयारी के लिए इंटरनेट के गहन उपयोग ने मुझे अपनी अध्ययन-योजना को प्रबंधित करने में मदद की.

जब मैंने शुरुआत की थी, तो यह कुछ बड़ा था, तो आकांक्षाएं और बड़ी थीं. मैं हमेशा मानता रहा कि परीक्षा मेरी पहुंच के भीतर है और मैं प्रत्येक प्रयास में जो भी कर सकता था, करता रहा.

हालाँकि, इसमें थोड़ा अधिक समय लगा; लेकिन, इस प्रक्रिया में मैं एक मजबूत और अधिक सकारात्मक व्यक्ति बन गया हूं.

मेरी सफलता में हर समय मेरे इस रवैये ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. असफलताओं को मुस्कुराहट के साथ स्वीकार करना और गलतियों से सीखने के साथ मेरे लिए परीक्षा के दबाव को संभालना आपेक्षाकृत आसान हो गया.

अगर मुझे इस प्रयास में उच्च रैंक प्राप्त करने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कुछ कारकों को सूचीबद्ध करना हो तो इसमें शामिल होंगे - स्मार्ट अध्ययन, आत्म-विश्लेषण और निरंतर सुधार, खुद पर विश्वास एवं दृढ़ता.

इसके अलावा साक्षात्कार के लिए एक समर्पित तैयारी और परीक्षक के दृष्टिकोण से सोच ने मुझे साक्षात्कार में बहुत उच्च अंक प्राप्त करने में मदद की.

सफलता का श्रेय

मेरा परिवार और दोस्त

सफलता का रहस्य

"अपना सर्वश्रेष्ठ दें, बाकी को भाग्य पर छोड़ दें"

आगानी उम्मीदवारों को प्रेरित करने हेतु सलाह

2 चीजें हैं "इच्छा" और “इरादा”

हम सब एक इच्छा लेकर यहां आते हैं; अब, दृढ़ संकल्प के साथ 'कड़ी मेहनत और स्मार्ट कार्य' करने का समय है, आपको निश्चित रूप से सफलता मिलेगी.

कुछ भी असंभव नहीं है; यह बात है केवल समय की.

"शुभकामनाएं" !Mayank-Gupta-ias-upsc-topper-cse-2108-177th-rank

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On Saturday 20th April 2019     

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