सिविल सेवा परीक्षा 2018 में एक बार फिर हिन्दी माध्यम का परिणाम आशानुरूप नहीं – अभी भी वास्तविकता से दूर

आज सिविल सेवा परीक्षा 2018 का परिणाम आये आठ-नौ दिन हो गए और इसमें हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों की सफलता पर मेरे कुछ अपडेट या प्रतिक्रिया न कर पाना और आपको सम्बोधित करने में थोड़ी देर हुई है. इसका कारण रहा कि मैं शीर्ष स्थानों पर चयनित उम्मीदवारों से सम्पर्क में व्यस्त रहा.

पर हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों से एक अलग लगाव है; अपने विचार इस संबंध में लिखना तो मैं रोज़ चाह रहा था पर हौसला बढ़ाने वाली बातों की शुरूआत कहाँ से करूँ; यही सोच बना रहा था; परन्तु, इन दिनों सोशल मीडिया पर हिन्दी माध्यम संबंधी नकारात्मक बातों के बीच अपना पक्ष रखना चाहिये कि नहीं, इसी कश्मकश में यह आठ-नौ दिन गुज़ार दिये.

पिछले वर्ष मैंने इस ओर कुछ कार्य शुरू किया था उसी कड़ी में यह लेख सिविल सेवा परीक्षा में हिन्दी माध्यम के साथ शामिल उम्मीदवारों में जोश जगाने का एक छोटा सा प्रयास है.

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बदलते वातावरण के साथ बदलना अत्यंत महत्वपूर्ण है.

सिविल सेवा परीक्षा में परिवर्तन के कारण उभरती हुई स्थितियों के साथ स्वयं में अपेक्षित बदलाव न ला पाने के कारण हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों को इस नकारात्मक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.

शब्दों में व्यक्त करना कितना आसान है पर सिविल सेवा परीक्षा में असफल हो जाने पर जो पीड़ा और निराशा का सामना करना पड़ता है वह केवल उम्मीदवार और उनके परिवार-जन ही झेलते हैं.

आज जो स्थिति हमारे सामने है वह हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों में क्रमिक रूप से गिरते मनोबल और ऊर्जा स्तर को दर्शा रही है.

"सोचा ही नहीं था जिंदगी में ऐसे भी फसाने होंगे,

रोना भी जरुरी होगाआंसू भी छुपाने होंगे."

दशा यह हो गई है कि हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों में हीन भवना घर कर बैठी है और आज, हिन्दी माध्यम को सुनिश्चित हानि की सम्भावनाओं के रूप में देखने के कारण उम्मीदवारों में भारी आशंका है.

प्रशासनिक सेवाओं में जाने का स्वप्न संजोये लाखों हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों की स्थिति इतनी दयनीय हो जायेगी ऐसा मैंने क्या किसी ने भी सपने में भी नहीं सोचा था.

मैंने पिछले वर्ष परिणाम के बाद लिखे अपने लेखों में इस तथ्य का स्पष्ट जिक्र किया था कि हिन्दी माध्यम के परिणाम वर्ष 2011 में सिविल सेवा (प्रारम्भिक) परीक्षा में आये परिवर्तन से पहले ही सिविल सेवा परीक्षा 2010 से प्रभावित होने शुरू हो गए थे.

मेरा मानना है कि हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों का जितना नुकसान यू.पी.एस.सी द्वारा लाए गए परिवर्तनों की वजह से हुआ, उससे कहीं अधिक कुछ कोचिंग संस्थानों के द्वारा उठाये गए कदमों ने उन्हें नकारात्मकता में धकेल दिया.

और बैठो हाथ पर हाथ रखछोड़ दो अपने भविष्य को कोचिंग संस्थानों के सहारे

वैकल्पिक विषयों के जाने-माने कोचिंग संस्थानों ने और इनसे जुड़े विशेषज्ञों ने इन परिवर्तनों के चलते सामान्य अध्ययन की ओर रुख कर लिया और कुछ नये समीकरण हमारे सामने आये.

कोचिंग संस्थानों को इन जोड़-तोड़ में समन्वय बैठाने में कुछ समय लगा और आवाजाही का क्रम निरन्तर जारी रहा, नित नये प्रयोग चलते जा रहे हैं फिर भी बड़े सपने दिखा कोचिंग संस्थान उम्मीदवारों को आकर्षित करने में सफल रहे हैं.

पर समय बीतता जा रहा है और उम्मीदवार तो अपना भविष्य दांव पर लगा बैठे हैं और एक मूक दर्शक की तरह किसी दैव्य चमत्कार की आस लगाए दिख रहे हैं.

यू.पी.एस.सी ने परीक्षा-प्रणाली में जब-जब, जो-जो परिवर्तन हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों ने मांगे, उनमें से अधिकांश स्वीकार कर महत्वपूर्ण बदलाव किये गये; परन्तु, हिन्दी माध्यम का परिणाम - वैसे का वैसा ही.

ऐसा लगने लगा है कि हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों की मारक-क्षमता क्षीण हो गई है. अब तो बस एक सहारा दिखता है कि कोई चमत्कार हो जाए और हिन्दी माध्यम के लिए भी यू.पी.एस.सी कोई आरक्षण सा कर दे? बस कुछ ऐसा हो जाये कि कियी तरह भाग्य के सहारे सफलता हाथ लग जाये.

क्या यह वाकई प्रारम्भिक परीक्षा पहुँच के बाहर है?

अरे भाई, सामान्य सा प्रारम्भिक परीक्षा का सामान्य अध्ययन का एक प्रश्न-पत्र है और वह भी सम्भाला नहीं जा रहा आप लोगों से.

प्रश्न-पत्र 2 तो क्वालिफाईंग हो गया है, तो विशेष कठिनाई नहीं.

बस मंसूरी जाने के ख्वाब दिल में संजोंये प्रारम्भिक परीक्षा से पहले बड़ी-बड़ी बातें, ढ़ींगे हाँक लें और महींनो पढ़ाई कर, कोचिंग संस्थानों में समय बिता, मॉक-परीक्षण दे-दे कर जब परीक्षा में शामिल तो होते हैं, पर परीक्षा के बाद हॉल से बाहर आते समय तोते उड़े होते हैं.

तर्क यह मिलता है कि हमने तो सटीक तैयारी की थी, परन्तु, यू.पी.एस.सी ने फिर कुछ ट्विस्ट ड़ाल दिये.

क्या कोचिंग संस्थान की कक्षाओं में कथा-भांजना चल रहा था जो यू.पी.एस.सी के घुमाव के लिए हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों तैयार नहीं हो पाये ?

यू.पी.एस.सी के लिए यह कोई नई बात नहीं दशकों से प्रारम्भिक परीक्षा हो या मुख्य परीक्षा; अप्रत्याशित परिवर्तन यू.पी.एस.सी की पुरानी पहचान हैं.

इसके बाद विवेक का इस्तेमाल तो होता नहीं; शुरू होता है तो कमियाँ निकालने का दौर और हम इधर-उधर की बातें कर, प्रतिज्ञा भी कर ड़ालते हैं कि अगली बार तो इसे तोड़ कर ही रहेंगे.

फिर एक वर्ष निकलता है, तैयारी होती है, अगली परीक्षा आती है और फिर वही क्रम दुहरता है.

स्पष्ट जान लें - कोचिंग संस्थानों की व्यवसायिकता उन्हें हिन्दी माध्यम से अंगेजी माध्यम की कोचिंग की ओर ले जाएगी और यह कोचिंग संस्थान पहले से और बड़े और सशक्त होते जाएंगे. आप देख रहे हैं कि ऐसा हो भी रहा है और लगभग सभी हिन्दी माध्यम के स्थापित कोचिंग संस्थान अंग्रेजी माध्यम की ओर रुख कर चुके हैं या करने के क्रम में हैं.

गुरू-शिष्य परम्परा का सही चित्रण

हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों की एक बात जो इन्हें अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों से अलग करती है वह है अपने कोचिंग के शिक्षकों पर अटूट विश्वास. अच्छी बात है कि आदर-सत्कार और सम्मान के मामले में हिन्दी माध्यम के उम्मीदवार आज भी इस परम्परा को निभा रहे हैं.

संस्कारी बने रहो और कोचिंग मठाधीशों से सिर्फ आशीर्वद लेते रहो, शायद किसी वर्ष भाग्य के सितारे चमक जाये और उच्च सफलता हाथ लग जाए.

और जब भी ऐसा होगा तो आप में से तो किसी एक का ही भाग्य खुलेगा; परन्तु, आपके कोचिंग संस्थान की तो चाँदी-ही-चाँदी.

फिर एक परिणाम से आकर्षण – अगले कई वर्षों तक नये उम्मीदवारों का आगमन और वही परिपाटी और एक बार फिर, वही अंधकार से झूझते लाखों भविष्य.

अभी भी समय है – जाग जाओ.

क्या करें ?

कोचिंग कोई बुरी बात नहीं और न ही मैं कोचिंग संस्थानों के बहिष्कार का संदेश दे रहा हूँ. पर कोचिंग के मायने समझें और सही प्रकार से उपयोग में लायें.

हकीकत में जो हो रहा है कि आजकल उम्मीदवारों तो चाहिये बनी-बनायी पाठ्य-सामग्री जिसे बस घोट कर पी जाएँ और इससे सफलता हाथ लग जायें.

पर यह परीक्षा ऐसी नहीं कि परंपरागत ढ़ंग से की तैयारी आपका बेड़ा पार लगा दे. सफलता के लिए चाहिये आप में चाहिये सामर्थ्य और अपनी तैयारी को परीक्षा के मानकों के समकक्ष ले जाने का ज़ुनून.

अपना कैरियर निर्माण करते समय यह आपका कर्तव्य बनता है कि अपने प्रयास की हर स्तर पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सटीक तैयारी करें और निरन्तरता सुनिश्चित करें जिससे सदैव आप पाठ्यक्रम के सम्पर्क में रह सकें.

कई बार मैने देखा है कि कुछ उम्मीदवार सोचने लगते हैं कि मेरे लिए कुछ विशेष टॉपिक्स और कोचिंग संस्थान द्वारा उपलब्ध पाठ्य-सामग्री के साथ तैयारी कर, सफलता प्राप्त करना कोई बड़ी बात नहीं. जहाँ ऐसी सोच आ जाये, मान कर चलिये कि ऐसे उम्मीदवारों ने स्वयं ही अपनी सफलता की सम्भावनाओं को कम कर लिया है.

यह स्वप्न, यह लक्ष्य आपका है

वास्तविक ज़रूरत है ऐसी तैयारी की कि यदि परीक्षा-भवन में प्रश्न-पत्र प्रयास करते समय कुछ अप्रत्याशित प्रश्न सामने आ जाये, कहीं आप कुछ भूल जायें या किसी विषय-वस्तु को ले कुछ भ्रम आ जाये; फिर भी आपका ज्ञान व जागरुकता आपका इतना साथ दे कि आप अपने को कट-ऑफ से ऊपर पायें.

इसका मतलब स्पष्ट है कि आपकी आवश्यकता जितनी है उसे पूरा करें; आपकी तैयारी का स्तर इतना हो कि आप परीक्षा-भवन में किसी क्षण भी तनावग्रस्त न हों. और निष्पादन ऐसा कि प्रसास सार्थक हो जाए.

हाँ, मैं भी कर सकता हूँ

हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों को चाहिये नया उत्साह और हाँ, मैं भी कर सकता हूँ वाली सोच.

सच में, आपको चाहिये एक संतुलित तैयारी के साथ प्रारम्भिक परीक्षा का सामना करने के लिए मानसिक तत्परता.

अच्छी तरह से तैयारी कीजिए, संचित ज्ञान और आत्म-विश्वास के साथ अपने लक्ष्य को सामने रख आगे बढ़ें.

निर्भिकता के साथ आगामी प्रारम्भिक परीक्षा में शामिल हो एक बार फिर से सफलता प्राप्त करने का प्रण लें, आप अवश्य ही विजय प्राप्त कर सकेंगे.

शुभकामनाएँ.

जारी...अगला भाग

10 कारक जो हिन्दी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा में आपके अभियान को सही दिशा दे सकते हैं

On Friday 19th April 2019     

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