कड़ी मेहनत, योजना और दृढ़ता भरा प्रयास आपको जीवन में यश दिला सकता हैं - गरिमा अग्रवाल (AIR 241; CSE 2017)

IIIT हैदराबाद से ECE में बी.टेक पूरा करने के बाद, खरगोन (मध्य प्रदेश) की गरिमा अग्रवाल ने अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद से एम.एस. (MULTI AGENTSYSTEMS) किया.

इसी बीच उन्होंने जर्मनी के बॉन विश्वविद्यालय के साथ रिसर्च इंटर्न के रूप में कार्य भी किया.

वर्ष 2016 में M.S. पूरा करने के तुरंत बाद सिविल सेवाओं में कैरियर बनाने की सोच के साथ गरिमा ने सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने का फैसला लिया. पर भाग्य में सफलता दुसरे प्रयास में लिखी थी और इस बार सिविल सेवा परीक्षा 2017 में शानदार सफलता मिली और 241वाँ रैंक प्राप्त हुआ.

गरिमा ने वैकल्पिक विषय के रूप में दर्शनशास्त्र को चुना.

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खरगोन (मध्य प्रदेश) निवासी, गरिमा अग्रवाल की पूरी स्कूली शिक्षा हिन्दी माध्यम में रही, परन्तु फिर भी UPSC की सिविल सेवा परीक्षा अंग्रेजी में लिख उच्च सफलता प्राप्त कर अपने लिए सिविल सेवाओं में स्थान बना सकीं.

गरिमा को हिंदी कविता लिखने, छोटे बच्चों को पढ़ाने का शौक है; वह एक विपुल वक्ता है जिसने संयुक्त राज्य अमेरिका मिनेसोटा में रोटरी यूथ एक्सचेंज के भाग के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व किया तथा आई.आई.आई.टी., हैदराबाद में प्लेसमेंट समिति के सदस्य भी रहीं. गरिमा को बी.टेक के दौरान 2014 में सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार प्रदान किया गया. उन्होंने AAMAS 2016, सिंगापुर में मल्टी एजेंट सिस्टम पर शोध पत्र भी प्रकाशित किया है.

हाथ में एक पेशेवर डिग्री के साथ गरिमा के पास आकृषक एवं व्यापक कैरियर विकल्प खुले थे; फिर भी अंतिम निर्णय 'सिविल सेवा' में कैरियर के पक्ष में रहा.

अपनी कैरियर पसंद के बारे में बताते हुए गरिमा ने बताया कि “सिविल सेवाओं में शामिल होने का कारण इसमें काम की विविधता, प्रतिष्ठा और समाज के लिए सीधे योगदान देने के अवसर की पेशकश ने मुझे अपनी ओर आकृषित किया. इसके अलावा यहां हमारी शिक्षा और कौशल-सेट का उपयोग बहुत व्यापक और बहुआयामी तरीके से किया जा सकता है.”

अपनी बहन प्रीति अग्रवाल, जो स्वंय सिविल सेवाओं (भारतीय डाक सेवा) में कार्यरत्त हैं, का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने बताया, “मेरी बहन प्रीति ने हमेशा सही सलाह दी और स्पष्ट निर्देश दिए बिना बहुत ही सूक्ष्मता से यह सुनिश्चित किया कि मेरी योजना और तैयारी सही दिशा में चले.

अपने परिवार और उनके योगदान के बारे में गरिमा ने बताया, “मेरा परिवार खरगोन (म.प्र.) में है और मुख्य रूप से व्यवसाय से जुड़ा है; परन्तु, मेरी सफलता में उनका बहुत बड़ा योगदान है. मेरी मां परीक्षा की तैयारी के दौरान दिल्ली में मेरे साथ ही रहीं. दरअसल, मेरे लिए यह उनके बिना संभव नहीं था.”

“मैं हमेशा मानती हूं - गरिमा रैंक # 241 हो सकती है; लेकिन, मेरे मम्मी-पापा # 1 रैंक हैं.”

परीक्षा-योजना और इस बारे में अपनी समझ के बारे में बात करते हुए गरिमा ने कहा कि “मुझे लगता है, पाठ्यक्रम की विशालता इस परीक्षा का सबसे कठिन हिस्सा है. एक उचित योजना और समय प्रबंधन आपको पूरे पाठ्यक्रम को कवर करने और समय के साथ अपनी तैयारी को गति देने में मदद करता है.”

अपनी तैयारी-यात्रा के बारे में खुलकर बात करते हुए गरिमा ने कहा, “अपने पहले प्रयास में मैं ईमानदारी से तैयारी नहीं कर सकी थी क्योंकि  मैंने कॉलेज के अंतिम वर्ष में ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर प्रारम्भिक परीक्षा में शामिल हुई.

मेरे इस कदम ने मुझे एक सबक दिया कि यू.पी.एस.सी. सिविल सेवा परीक्षा के लिए ईमानदारी से कम से कम पूर्ण एक वर्ष की केंद्रित तैयारी की आवश्यकता है.

अपने दूसरे प्रयास की कल्पना मैं अपने पहले गम्भीर प्रयास के रूप में करती हूं; और सच कहूं तो इस बड़ी, चुनौतीपूर्ण परीक्षा में मुझे इस प्रयास में भी सफल होने की उम्मीद नहीं रखी थी. पर मुझे लगता है कि इस प्रयास में मेरी सफलता में नियोजन ने सबसे अधिक योगदान दिया.

यह केवल उचित नियोजन, विस्तृत समय-सारणी और नियमित अभ्यास (दोनों प्रारम्भिक और मुख्य परीक्षा) के कारण है जिसने मुझे अपने लिए एक उच्च रैंक सुरक्षित करने में मदद की.

सफलता का रहस्य: कड़ी मेहनत, योजना और दृढ़ता संयुक्त प्रयास जीवन के किसी भी क्षेत्र में आपको सफलता दिला सकता है.

भविष्य के उम्मीदवारों को प्रेरित करने हेतु सलाह: हम सभी इस परीक्षा की तैयारी कुछ उत्साह के साथ-साथ कुछ डर, संशय और आशंकाओं के साथ शुरू करते हैं.

मैं भी इसी सब का शिकार रही; परन्तु, इस परिणाम ने मेरी सभी शंकाओं का अच्छी तरह से उत्तर दिया है.

यहां कुछ सबक जो मैंने इस प्रक्रिया में सीखे है भविष्य के उम्मीदवारों को प्रेरित करने के लिए सांझा कर रही हूँ.

  • मैंने अपनी पूरी स्कूली शिक्षा मध्य प्रदेश के एक दूरस्थ शहर खरगोन से की है और फिर भी, सही मायने में मैं डेढ़ साल की तैयारी में परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकी. इसके साथ इस मिथ्या को तोड़ सकी कि एक दूरस्थ पृष्ठभूमि आपकी सफलता में बाधा नहीं है.
  • मैंने अपनी पूरी स्कूली शिक्षा हिन्दी माध्यम में की है, लेकिन फिर भी मैंने UPSC की परीक्षा अंग्रेजी में लिखी. यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भाषा एक बाधा नहीं है बल्कि अभिव्यक्ति का एक माध्यम मात्र है.
  • मैं एक इंजीनियर हूं और आकर्षक नौकरी/पीएच.डी. ऑफर के बजाय सिविल सेवाओं को कैरियर के रूप में चुनना एक कठिन निर्णय था. लेकिन, अपने द्वारा लिए गए निर्णय में विश्वास रखने से आपको किसी भी असुरक्षा को पार करने में मदद मिलती है.
  • मैं एक महिला हूं और फिर भी अपनी दूसरी प्राथमिकता के रूप में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) को चुना, क्योंकि मैं वास्तव में महसूस करती हूं कि पुलिस में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व महिला सुरक्षा में एक नया आयाम जोड़ेगा.

इसलिए, अगर मैं यह सफलता प्राप्त कर सकती हूं, तो कोई भी सिविल सेवा परीक्षा में अपने स्वप्न पूरे कर सकता है !

Last Update Thursday 18th July 2019     

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