बस अपने दिल की सुनी और कॉर्पोरेट जगत में अपना कैरियर छोड़, सिविल सेवाओं में अपने लक्ष्य को प्राप्त कर ही लिया - सूरज पटेल (AIR 475; CSE 2017)

मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद से वर्ष 2013 में सूरज पटेल ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक. किया.  इसके बाद कैरियर की शुरूआत पेप्सिको इंडिया के साथ हुई.

लगभग दो वर्ष की सेवा के बाद, उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के लिए गंभीरता से तैयारी करने के लिए नौकरी छोड़ दी.

अपने तीनों प्रयासों में सूरज ने सिविल सेवा परीक्षा को पास किया और धीरे-धीरे रैंकिंग में सुधार के साथ-साथ सेवाओं में भी अपने लक्ष्य तक पहुँचने का अवसर मिला. प्रथम प्रयास में भारतीय राजस्व सेवा (आई.आर.एस.), दूसरे प्रयास में भारतीय पुलिस सेवा (आई.पी.एस.) और सिविल सेवा परीक्षा 2017 के साथ अपने तीसरे प्रयास में उन्हें फिर एक बार शानदार सफलता मिली है.

उन्होंने नृविज्ञान (Anthropology) को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना.

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हालांकि परीक्षा लेखन माध्यम अंग्रेजी रहा पर विनम्र और ज़मीन से जुड़े सूरज पटेल उत्तर भारत की ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले ऐसे आकांशी उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सभी कठिनाईयों और प्रतिकूलताओं के बावजूद मानते हैं कि आपके सपने, आपकी धारणायें और समझ, आपके स्वप्न के मूर्तरूप देने में सक्षम हैं; सिविल सेवा परीक्षा में सूरज की शानदार सफलता इसका एक छोटा सा उदाहरण है.

उनके कार्यों में, प्रत्येक कदम में मूल्यों और नैतिकता का मिश्रण प्रतिबिंबित होता है और जब यह प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा में उनकी उपलब्धियों की बात आती है, तो वह अपनी सफलता पर गर्व नहीं करते, अपितु वे इसे हनुमान जी की कृपा के रूप में स्वीकार करते हैं.

NSTSE छात्रवृत्तिधारी, डिबेटर, ब्लॉगर सूरज में एक बहुमुखी प्रतिभा वाला व्यक्तित्व साफ ऊभर के आता है; वह शतरंज और मुक्केबाजी खेलना पसंद करते हैं, रोबोटिक्स में भी रुचि है और ध्यान तथा प्राणायाम का निरन्तर अभ्यास करते हैं.

अपने इन्हीं कौशल और लक्षणों के साथ सूरज एक के बाद एक कदम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ाने में सफल रहे.

इस बातचीत की शुरुआत करते हुए सूरज ने बताया कि, “यह सब हनुमान जी के प्रति मेरे विश्वास और मेरे परिवार के आशीर्वाद के कारण है. मैं एक कृषि परिवार से संबंधित हूं. कानपुर देहात के पास मेरा गाँव है कुवाँखेरा, 10-12 वर्ष की आयु तक मेरा निवास यहीं रहा और 5 वीं कक्षा तक पढ़ाई यहीं हुई. यह शुरूआती गहरा ग्रामीण संपर्क आज भी मुझमें विनम्रता और जमीन से जुड़ा रहने में मदद करता है.”

अपने परिवार से परिचित कराते हुए सूरज ने बताया, “मेरे पिता एक किसान हैं और माँ एक प्राथमिक शिक्षक हैं; वे हमेशा शिक्षा को सबसे ऊपर रखते थे. उन्होंने जीवन की सभी बुनियादी वस्तुओं का त्याग किया ताकि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें. परिणाम यह है कि मेरी सफलता के साथ, मेरा छोटा भाई सरकारी कॉलेज से एम.बी.बी.एस. कर रहा है; मेरी छोटी बहन IIIT से पास होने के बाद एक अमेरिकी बैंक में कार्यरत्त है.

“मेरी पत्नी ने भी इस यात्रा में मेरा साथ दिया और मेरा उत्साह बनाए रखा.”

कैरियर चयन और अपने मन की बातों के साथ अतीत में झांकते हुए सूरज ने बताया, “मैंने यदि कॉर्पोरेट दुनिया में अपना कैरियर जारी रखा होता तो शायद जीवन तेज गति से आगे बढ़ सकता था, परन्तु, मेरी रुचि कुछ और ही खोज रही थी.”

सिविल सेवाओं के प्रति अपने जुनून का खुलासा करते हुए सूरज ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि जब कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय कुछ कशमकश चल रही हो, तो आप हमेशा अपने दिल की सुनें. मैंने सिविल सर्विसेज को एक अच्छे और स्थिर कैरियर के रूप में देखा, जो समाज में सेवा करने का अवसर प्रदान करता है. इसके अलावा, यह ज्ञान और सार्वजनिक पहुँच के मामले में आत्म-संवर्धन के बहुमूल्य अवसर प्रदान करता है.”

अपनी तैयारी के बारे में विस्तार से बताते हुए सूरज ने कहा, "जब मैंने तैयारी शुरू की, तो मुझे अपने स्कूल के साथी आलोक यादव से तैयारी की योजना पर सही सलाह मिली, जो 2015 में IAS बने थे."

हमारी परवरिश ऐसी थी कि शुरू से ही मैं अपने लक्ष्य के प्रति भावुक रहा और कड़ी मेहनत और पूरे समर्पण के साथ सर्वश्रेष्ठ दे अपने सभी निर्णयों को पूरी तरह से सही ठहराने की कोशिश करता हूँ.

सिविल सेवा परीक्षा 2015 में अपने पहले प्रयास में मुझे 819वी रैंक प्राप्त हुई और आई.आर.एस. पद पर चयनित हुआ. मेरी तैयारी में दृढ़ता एक ऐसा कारक था जिसने निरन्तर सुधार करने में मदद की और अगले प्रयास में मुझे 602 वीं रैंक मिली, जिससे मुझे आई.पी.एस. (यूपी कैडर) का पद मिला.

इस प्रयास में, मैं इस सफलता प्राप्त करने से पहले ही अपनी सफलता की कल्पना कर रहा था. इस सोच के पीछे सिर्फ एक कारण था - मैं अपने लक्ष्य पर पूरी तरह से केंद्रित था.

क्योंकि मैं प्रत्येक बीतते वर्ष अपने प्रदर्शन में सुधार करने में सक्षम रहा और मुझे पता था कि मुझे इस प्रयास में बस थोड़ा सा ज़ोर देने की ज़रूरत है.

अब, इस तीसरे प्रयास में, मैं अपने परीश्रम का फल प्राप्त करने में सक्षम हूँ जिस पर मेरे सभी प्रयास निर्देशित रहे; और अंततः मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सका.

यदि मैं मुड़ कर अपने प्रयासों को देखता हूं और विश्लेषण करूं, तो लगभग प्रत्येक क्षेत्र में कुछ सुधार ला पाने में सक्षम रहा.

मैंने अपने सामान्य अध्ययन के प्राप्तांक में बहुत सुधार किया है और यहां तक ​​कि वैकल्पिक विषय के अंकों से भी सहायता प्राप्त हुई है. निबंध भी है जिसने मुझे इस प्रयास में अच्छा स्कोर दिया.

सफलता का रहस्य: सर्वशक्तिमान पर अटूट श्रद्धा और अपने आप पर विश्वास.

भविष्य में आकांक्षी उम्मीदवारों को प्रेरित करने के लिएमेरा मानना है कि, "जो आप कर रहे हैं उस पर विश्वास करें और अपने उद्देश्य को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें."

मैंने दो उद्धरणों में दृढ़ता से विश्वास किया:

  • कभी हार मत मानो
  • करो वह, जो करने की जरूरत है

ये कुछ शब्द वह सब कहते हैं जो आपको सफलता का मार्ग दिखा सकें; मुझे लगता है कि मुझे इन सुनहरे शब्दों के बारे में अधिक विस्तार करने की आवश्यकता नहीं है.

Last Update Thursday 18th July 2019     

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