एक वैकल्पिक कैरियर हाथ में न होता तो न तो मैं संघर्ष कर पाता और न ही सफल; आशीष कुमार, सिविल सेवा परीक्षा 2017 में हिंदी माध्यम से चयनित

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपने मूड के हिसाब से चलते हैं और सही अवसर के इंतजार में समय निकालते रहते हैं और कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कर्म से अपने भाग्य की रेखाओं को बदलने में विश्वास रखते है.

जहाँ असफलता तोड़ कर रख देती है वहीं आशीष कुमार ने लगातार नकारात्मक परिणाम के बावजूद हार नहीं मानी और अपने नौवें प्रयास में आखिर सफलता पा ही ली.

एक साधारण पृष्ठभूमि से आये आशीष ने सिविल सेवा परीक्षा 2009 से की शुरूआत को अंततः 2017 की परीक्षा में धैर्य और दृण-संकल्प दिखा लक्ष्य प्राप्ति के साथ अपना स्वप्न साकार किया.

सिविल सेवा परीक्षा में आशीष ने वैकल्पिक विषय के रूप में हिंदी भाषा का साहित्य चुना.

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यह जिन्दगी एक अजीब पहेली है जहाँ किसी के जीवन की सभी चीज़े आशानुरूप चलती हैं और भाग्य साथ दता है; तो किसी की परिस्थितियाँ ऐसी कि कुछ चीज़ नहीं होनी हो तो, अप्रत्याशित संयोग व हज़ार तरीके की अड़चनें.

पर कुछ लोग दृण इच्छाशक्ति वाले होते हैं जो अंत तक हार नहीं मानते और तमाम मुश्किलों का सामना कर आखिर अपनी राह ढूंढ़ ही लेते हैं.

ऐसी ही कुछ कहानी है उन्नाव, उत्तर प्रदेश के आशीष कुमार की जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2017 में लगातार आठ आसफल प्रयासों के बाद अपना लक्ष्य प्राप्त किया.

नौंवे प्रयास में मिली सफलता के बारे में विस्तार से बताते हुए आशीष कहते हैं, 2009 में जब मैंने अपना पहला प्रयास दिया था तब न तो मुझे इस परीक्षा के बारे में पूरी तरह से पता था और न ही मेरे पास इसके लिए जरूरी पुस्तकें थी.

पिछले प्रयासों में तमाम उतार चढ़ाव लगे रहे; जिसे निम्न रूप में समझा जा सकता है - 

2009- प्रारम्भिक परीक्षा में फेल 

2010- मुख्य परीक्षा में फेल 

2011- साक्षत्कार के चरण से बाहर 

2012- प्रारम्भिक परीक्षा में फेल 

2013-मुख्य परीक्षा में फेल

2014-मुख्य परीक्षा में फेल

2015-साक्षत्कार के चरण से बाहर 

2016- प्रारम्भिक परीक्षा में फेल 

2017- अंतिम रूप से चयनित 

इतने लम्बे समय तक प्रयासरत्त रहना एक ज़ुनून नहीं तो और क्या है

सिविल सेवा में कैरियर से अपने मोह के बारे में आशीष का मानना है कि यह समाज के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने की व्यापक जगह, कार्य विविधता, असीम चुनौतियाँ व एक सामान्य परिवेश में पढ़े -लिखे युवा के लिए अपनी पहचान बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जगह है.

अपनी कैरियर यात्रा के बारे में ज़िक्र करते हुए आशीष करते हैं कि इस ओर मेरा रुझान बहुत छोटी उम्र (2002) से ही हो गया था जबसे मैंने प्रतियोगिता  दर्पण पढ़नी शुरू की और उसी में आई.ए.एस. की परीक्षा से जुड़े अतुल कपूर सर के लेख पढ़ कर, इस परीक्षा के बारे में जाना.

धीरे-धीरे इसके बारे में मेरे विचार स्पष्ट होते गए और मुझे लगा मैं इसके लिए सज्य हूं. मेरी रुचि जैसे-जैसे बड़ी, वैसे-वैसे मैं तैयारी के बारे में सोचने लगा और रणनीतियाँ बनाने लगा.

जब मैंने इस परीक्षा में शामिल होने की पात्रता पाई तो सर्वप्रथम मैंने अपनी पृष्टभूमि को देखते हुए पहले कैरियर की सुरक्षा पर ध्यान दिया , इसके बाद पूरी तरह से सिविल सेवा परीक्षा में लगा.

अगर एक अच्छी जॉब में न होती, तो शायद इतने लम्बे समय तक लगातार असफलता के बाद जोश न बरकरार रह पाता

यह मेरी सफलता में एक महत्वपूर्ण कारक कहा जा सकता है.

मुझे किसी तरह की चिंता न थी. दूसरे शब्दों में कहूँ तो हारने के लिए कुछ न था, जीतने  के लिए पूरी दुनिया पड़ी थी

मेरी सफलता में मेरे परिवार का अनन्य सहयोग रहा है. मेरे परिवार में माता -पिता के साथ 2 छोटे भाई थे. पिता जी की मृत्यु 2010 में हो गयी और इसी वर्ष फरवरी माह में छोटे भाई की एक रोड एक्सीडेंट में असमय मौत हो गयी है. इन परिस्थितियों में विशेषकर छोटे भाई अभय पटेल ने मुझे घर की जिम्मेदारियों से मुक्त रखा और मैं पूरी तरह से अपना ध्यान आई.ए.एस. की परीक्षा में क्रेन्द्रित कर सका.

पर ऐसा नहीं कि मेरा ध्यान केवल सिविल सेवा परीक्षा पर ही रहा 

मैं निरन्तर अन्य कैरियर विकल्पों में भाग्य अजमाता रहा जिसके फलस्वरूप मुझे सकारात्मक परिणाम भी मिले और निम्न चयन भी हुए-

इंस्पेक्टर , उत्पाद एवं सीमा शुल्क , ( एस.एस.सी. , 2010 )

ऑडिटर , डिफेंस अकॉउंट ,  (एस.एस.सी. 2008 )

रिव्यु अफसर , हाई कोर्ट प्रयागराज ( 2016 )

डाटा एंट्री ऑपरेटर , चंडीगढ़ ( एस.एस.सी. 2009 )

क्लर्क स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ( 2009 )

अन्य आधा दर्जन अस्सिटेंट कमाडेंट, सब इंस्पेक्टर , UP PCS  की विविध आदि की परीक्षा में सफल.

और इस यात्रा का अंतिम पढ़ाव - सिविल सेवा परीक्षा 2017 में सफलता.

सफलता का सबसे बड़ा कारक

इस प्रयास में सफलता में सबसे बड़ा योगदान मेरे वैकल्पिक विषय (हिन्दी भाषा का साहित्य) में अच्छे अंको का रहा है. मैं इस वर्ष पुरे देश में हिंदी साहित्य में सर्वाधिक अंक लाने वाले उम्मीदवारों में से एक हूँ.

सफलता का रहस्य

अपने पर अडिग विश्वास , हार न मानने की आदत , कठोर परिश्रम (जॉब में होने के चलते मैं सप्ताहांत में 12 से 14 घंटे पढ़ाई करता था ताकि इसका कोर्स पूरा कर सकूं)

सफलता का श्रेय

मेरी सफलता में परिवार के लोगों से साथ साथ बहुत से लोगों का सहयोग है. वर्ष 2014  के हिंदी माध्यम के टॉपर श्री निशांत जैन , वर्ष 2016 के श्री गंगा सिंह राजपुरोहित जी से मुझे अपार प्रेरणा मिली. श्री राजेंद्र पैंसिया (आई.ए.एस., उत्तर प्रदेश) से भी मैं बहुत प्रभावित हुआ.

आगामी परीक्षा में शामिल होने जा रहे उम्मीदवारों को संदेश

भविष्य में सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों को प्रेरित करने को मैं अपनी तैयारी के दिनों से ही जो सीखा, उसे मित्रों से साझा कर रहा हूँ.

नए उम्मीदवारों को मेरी सलाह निम्न बिंदुओं पर है - 

* वैकल्पिक विषय सोच समझ कर चुने, उसे बदले नहीं.

* उत्तर लेखन अभ्यास जमकर करें, उसके बगैर सफल होना मुश्किल है.

* असफल होने पर भी धर्य बनाये रखें, मुझे 9 साल बाद सफलता मिली है, सोचिये इन तमाम सालों में मुझे कितनी बार मायूसी हुई होगी

* स्वयं पर अडिग विश्वास रखे.

* अपने पढ़ाई के घंटे बढ़ाये. इन दिनों 4 या 5 घंटे की पढ़ाई से कोई छोटा एग्जाम भी नहीं निकलता. अपवादों को छोड़ दे तो सिविल सेवा की परीक्षा के लिए 10 से 12 घंटे पढ़ना बहुत जरूरी है.

* अपनी क्षमता के अनुरूप, अपनी मौलिक रणनीति बनाये.

Last Update Thursday 18th July 2019     

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