परीक्षा की प्रकृति को समझें और सकारात्मक सोच के साथ सिविल सेवाओं में अपना स्थान बनायें – सूरज सिंह IPS

सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के बारे में और हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों में सफलता की आशाएँ जगाने में अपना योगदान निरन्तर देने का प्रयास जारी रखे हूँ

यह लेखों की श्रृंखला इसी कड़ी में शुरूआत की हिंदी माध्यम से सर्वोच्च स्थान प्राप्त चिरपरिचित निशांत जैन (रैंक 13, सिविल सेवा परीक्षा 2014) से.

इस श्रृंखला में आपके मार्गदर्शन के लिए प्रस्तुत है हिंदी माध्यम से चयनित भारतीय पुलिस सेवा में कार्यरत्त सूरज सिंह (रैंक 189, सिविल सेवा परीक्षा 2014 - हिंदी माध्यम से चयनित द्वितीय रैंक) के साथ अंतरग बातचीत का सारांश.

अपने पिछले प्रयास (सिविल सेवा परीक्षा 2013) में भी सूरज सफल रहे और उनका भारतीय राजस्व सेवा में चयन हुआ.

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यह एक नया प्रयास है जिसमें मैंने हाल के वर्षों में हिंदी माध्यम से चयनित उम्मीदवारों से इस विषय पर चर्चा की और उनके अनुभवों और रणनीतियों को आपसे सांझा करने का प्रयास किया है जिससे आपका मार्गदर्शन हो सके और

सूरज सिंह आज भी निरन्तर सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हो रहे अभ्यर्थियों से जुड़े रहते हैं.

इस प्रयास में उन्होंने परीक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश ड़ाल, अपने अनुभवों के आधार पर अपने विचार सांझा करे हैं जिससे आप लाभान्वित हो सकें तथा उच्च सफलता प्राप्त करने में सक्षम हो जायें.

सूरज सिंह (रैंक 189, सिविल सेवा परीक्षा 2014)

प्र. इस परीक्षा की अप्रत्याशित प्रकृति को ध्यान में रखते हुए कि कैसे तैयार किया जाना चाहिए ?

सूरज सिंह : सिविल सेवा परीक्षा वाकई में अप्रत्याशित है और यदि मैं हिन्दी माध्यम के परिप्रेक्ष्य में बात करूँ तो यह शत-प्रतिशत सत्य प्रतीत होती है.

इसलिए उस मार्ग की अनुशंसा मैं कभी नहीं करूँगा जिस पर मैं खुद नहीं चला हूँ.

मैंने खुद के लिए एक बैक-अप प्लान रखते हुए तैयारी की और यही सलाह मैं आगामी परीक्षा में शामिल होने जा रहे अभ्यर्थियों को भी देना चाहूँगा.

इस परीक्षा की तैयारी के दौरान सदैव मैं कार्यरत्त रहा. शुरूआत बैंक पी.ओ. में 7वाँ रैंक प्राप्त कर कैरियर विकल्प सुनिश्चित किया. फिर, SSC ग्रेजुएट लेवल परीक्षा में 23वें स्थान द्वारा इंस्पेक्टर पद पर चयन. अगला कदम दिल्ली विश्वविद्यालय से Law Entrance  में प्रथम स्थान और इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर ध्यान लगाया.

वैकल्पिक कैरियर हाथ में होने से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान कोई डर नहीं था.

मेरे प्रयास अपने लिए एक और प्रतिष्ठित पद पाने पर केन्द्रित रहे और मेरा लक्ष्य अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ देने का रहा और इसमें मुझे सफलता भी मिली.

प्र. टापर्स निसंदेह अभ्यर्थियों पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं और सदैव उच्च सफलता हेतु प्रेरणा देते हैं. पर हिन्दी माध्यम से हाल के वर्षों में हिन्दी माध्यम से उच्च स्थानों पर सफलता के बावजूद हिन्दी माध्यम के परिणाम बहुत आशाजनक नहीं रहे हैं ?

सूरज सिंह : यह बिलकुल सही है कि पिछले कुछ वर्षों में हिन्दी माध्यम से परिणाम बहुत आशाजनक नहीं रहे हैं. मैं सिविल सेवा परीक्षा 2013 में अपने चयन की बात करूँ तो उस वर्ष कुल 1122 चयन में से शीर्ष 200 रैंक में केवल 2 उम्मीदवारों का हिन्दी माध्यम से चयन हुआ था. मेरा 334वें रैंक पर चयन के साथ हिन्दी माध्यम से तीसरा स्थान था. मुझे इस प्रयास में भारतीय राजस्व सेवा मिली.

सिविल सेवा परीक्षा 2014 में मेरा फिर चयन हुआ और कुल 1296 सफल उम्मीदवारों में मुझे 189वाँ रैंक प्राप्त हुआ. यह परिणाम वैसे शायद आकर्षक न लगे, पर यह हिन्दी माध्यम से द्वितीय स्थान पर चयन था.

इस वर्ष सिविल सेवा परीक्षा 2017 में हिन्दी माध्यम से परिणाम साधारण से दिख रहे हैं परन्तु परिस्थिति चाहे कैसी हो हमें हार नहीं माननी है.

मन के हारे हार और मन के जीते जीत

न खुद निराश हों न ही मन में निराशा को स्थान दो. ज़रूरत है आत्म-निरीक्षण की जिसके द्वारा प्रयास में रह रही कमियों को ढ़ूंढ़, उन्हें दूर करना है.

प्र. आपके अनुसार इस परीक्षा में हिंदी माध्यम ले कर तैयारी करने एवं सफलता प्राप्त करने में रुकावट पिछले वर्षों में प्रणाली में आये परिवर्तन हैं या उम्मीदवारों की सोच ?

सूरज सिंह : हिन्दी माध्यम से तैयारी करने में कुछ रुकावट है वह एक हद तक हाल में आये कुछ परिवर्तनों का परिणाम है, पर बड़ा कारण हिन्दी माध्यम से उम्मीदवारों की सोच है. अधिकांश उम्मीदवार अपने को उभरती ज़रूरतों के अनुरूप बदल न सके.

कुछ हद तक हमारे समाज की सोच भी जिम्मेदार है जहाँ कुछ लोग आज भी मानते हैं कि अंग्रेजी क़ाबलियत की प्रतीक है.

परन्तु इससे हतोत्साहित होने की ज़रूरत नहीं. दृणनिश्चय के साथ सफलता के शिखर प्राप्त कर पाना नामुमकिन नहीं.

प्र. हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं - क्या अंग्रेजी का सीमित ज्ञान विचलित कर रहा है या तैयारी को प्रभावित करने के कोई और कारण हैं ?

सूरज सिंह : हिन्दी माध्यम के परिणाम से उम्मीदवारों में निराशा ज़रूर है पर उम्मीदवार विचलित नहीं हुए हैं. आप खुद महसूस करेंगे कि हिन्दी माध्यम से शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों की संख्या में कोई गिरावट तो दिखती नहीं.

साधारण सी बात है हिन्दी माध्यम से आने वाले उम्मीदवार उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे हिन्दी भाषी क्षेत्र से आते हैं जहाँ ग्रामीण-क्षेत्रों में आज भी सिविल सेवाओं को मान्यता दी जाती है.

सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवर्तन के आगाज़ के रूप में प्रत्येक परिवार में युवा सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने का स्वप्न संजोते हैं.

प्र. हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों में कमी कहाँ दिखती है जो वह तैयारी और परीक्षक की सोच के मध्य गैप को भर नहीं पा रहे हैं ?

सूरज सिंह : थोड़ी बहुत समस्या भाषा के स्तर पर है.

हिन्दी माध्यम से अच्छा परिणाम न आने का एक कारण उत्तर-पुस्तिकाओं की चौकिंग को ले भी हो सकता है जहाँ अधिकांश परीक्षक अंग्रेजी माध्यम से और केन्द्रीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध होते हैं जिससे कहीं ना कहीं हिन्दी माध्यम का उचित मूल्यांकन प्रभावित होता है.

प्र. लोग कहते हैं कि वैकल्पिक विषय में अंक नहीं मिल पा रहे जहाँ तक मैं देख पा रहा हूँ सिविल सेवा परीक्षा 2017 में कई उम्मीदवारों ने 300 +  अंक प्राप्त किये पर फिर भी उच्च स्थान न पा पाये ?

सूरज सिंह : वैकल्पिक विषय में सभी उम्मीदवार उच्च अंक प्राप्त कर पाये यह संभव नहीं.

यह आपकी रणनीति पर निर्भर करता है कि आप सामान्य अध्ययन में अच्छे अंक अर्जित कर पाते हैं तो वैकल्पिक विषय पर भार कुछ कम हो जाता है.

यह परीक्षा एक संतुलित दृष्टिकोण चाहती है और आपको प्रत्येक प्रश्न-पत्र में अपनी ओर से सर्वोत्तम प्रयास देना है.

प्र. क्या आप नहीं सोचते कि हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों ने अपने को केवल कुछ ही वैकल्पिक विषयों तक ही सीमित कर लिया है ?

सूरज सिंह : मैं इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों ने अपने को कुछ एक वैकल्पिक विषयों तक सीमित रखा है. पर क्या यह दोष उम्मीदवारों के सिर मढ़ दिया जाए ?

जैसा प्रचलन है हिन्दी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा में वैकल्पिक विषयों के नाम पर गिने-चुने विषय जैसे इतिहास, दर्शनशास्त्र व हिन्दी भाषा का साहित्य का नाम आता है. कभी-कभी समाजशास्त्र इस सूची में स्थान पा जाता है. इन विषयों और एक दो और को छोड़ किसी अंय विषय का चयन आत्मघाती माना जाता है.

ऐसा नहीं कि हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि व ज्ञान इन कुछ विषयों तक सामित है परन्तु माहौल ऐसा है कि आप कुछ अलग सोचें और नकारात्मक टिप्पणियों का शिकार बनें.

इसका केवल एक उपाय है कि सोच में बदलाव लाया जाए और यदि आप किसी अन्य विषय के साथ आरामदायक स्थिति महसूस करते हैं तथा परीक्षा के मानकों के अनुरूप उच्च प्रयास दे सकने में समर्थ हैं तो अवश्य इस विषय को वैकल्पिक विषय के रूप में चुनने के बारे में सोच सकते हैं.

प्र. इस परीक्षा का सामने करने के लिये क्या तैयारी के शुरू में ही अपने लिये कोई समय-सीमा या प्रयासों की संख्या संबंधी सोच बना लेना हितकर होगा या लक्ष्य प्राप्ति तक प्रयासरत्त रहना चाहिये ?

सूरज सिंह : मेरा मानना है कि तैयारी शुरू करने से पहले ही आत्म-मूल्यांकन करने के बाद ही अपनी रणनीति का निर्धारण करना चाहिये और समय-सीमा का निर्धारण कर तैयारी शुरू करें.

‘One Size Fits All’ वाला दृष्टिकोण कारगर नहीं.

यदि आपके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ है और आप सिविल सेवा में कैरियर के प्रति ज़ुनून रखते हैं तो अपना लक्ष्य प्राप्त करने तक प्रयास कर सकते हैं.

यदि आपके पास ज़ुनून तो है पर आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि परिवार लम्बे समय तक साथ दे पाए तो ऐसे में आप अपने लिए दो या तीन प्रयासों में वांच्छित सफलता पाने का लक्ष्य रखें अन्यथा पहले अपने को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसी विकल्प को तलाशें और फिर यहाँ अपना भाग्य आजमायें.

प्र. हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों के समझ चुनौतियाँ और कोचिंग संस्थानों की भूमिका

सूरज सिंह : हिन्दी माध्यम में विश्वसनीय कोचिंग का वर्तमान में आभाव है ख़ासकर सामान्य अध्ययन हेतु.

मैंने स्वयं दोनो वर्ष किसी संस्था से सामान्य अध्ययन की कोचिंग नहीं ली.

अपने पर भरोसा रखें और ज्ञानेंद्रियां खुली रखें. मार्गदर्शन इंटरनेट पर बिखरा पड़ा है साथ ही सीनियर्स से भी आप मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं.

अपने बहुमूल्य समय, पैसे और प्रयासों को बचाएं और मण्डी में भेड़चाल की मानसिकता से बचें.

प्र. अंत में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न: क्या प्रारंभिक परीक्षा पार करना वास्तव में एक चुनौती है क्योंकि कुछ उम्मीदवार कहते हैं कि कभी-कभी यह पूर्णतः भाग्य पर अश्रित है. आपका मत.

सूरज सिंह : बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के कारण यह स्तर चुनौतीपूर्ण अवश्य है.

भाग्य का खेल तो जीवन में हर पल चलता ही रहता है परन्तु जिस क्षण हम सिविल सेवा परीक्षा में भाग लेने का निर्णय लेते हैं, सही दिशा में की जाने वाली मेहनत का महत्व सामने आता है.

सटीक तैयारी के साथ उम्मीदवार प्रारंभिक परीक्षा में सफलता प्राप्त कर मुख्य परीक्षा में शामिल होने की पात्रता पाते हैं.

प्रारम्भिक परीक्षा में अब सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र 2 क्वालीफाईंग हो जाने से हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों में कुछ राहत है और इस तथ्य को ध्यान में रखना चाहिये.

सकारात्मक सोच के साथ एकाग्रता से तैयारी करें और परीक्षा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में अपनी ओर से कोई कसर न छोड़ें.

Last Update Sunday 4th November 2018     

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