सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के लिए आपको चाहिये तैयारी की एक समुचित रणनीति और बिना विचलित हुए सफलता की आशा के साथ समग्र प्रयास - रतन दीप गुप्ता (सिविल सेवा परीक्षा 2017 में हिन्दी माध्यम से सफल)

अपने पाँचवे प्रयास में एक लम्बी प्रतिक्षा के बाद अपना लक्ष्य पाने वाले रतन दीप गुप्ता ने सिविल सेवा परीक्षा 2017 में सफलता प्राप्त की है.

वर्ष 2009 में स्नातकोत्तर के बाद कैरियर की खोज में पहला चयन वर्ष 2010 में भारतीय स्टेट बैंक में असिस्टेंट और साथ ही कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से एकाउन्टेंट के पद पर हुआ और यहीं कार्यरत्त रहे.

अपने सभी प्रयासों में रतन दीप ने वैकल्पिक विषय के रूप में हिन्दी भाषा के साहित्य को चुना.

 By:     

सफलता की राह कभी सीधी नहीं होती और कुछ लोगों के लिए तो कई मोड़, कई बाधाओं को पार करने के बाद ही सफलता का मुख देखने को मिलता है और ऐसा ही कुछ घटित हुआ रतन दीप गुप्ता (रैंक 767, सिविल सेवा परीक्षा 2017) के साथ.

अपने भविष्य के बारे में स्वप्न देखते हुए रतन दीप की निगाहें टिक गई थीं सिविल सेवाओं में कैरियर बनाने पर. निर्णय बड़ा था और यह स्पष्ट था कि यह इतना आसान नहीं.

अपने परिवार के प्रति कर्तव्यों को ध्यान में रख अपने गंतव्य कैरियर तक पहुचने की तैयारी से पहले रतन दीप ने एक वैकल्पिक कैरियर सुरक्षित करना उचित समझा और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो एक के बाद एक सफलता भी प्राप्त की. भारतीय स्टेट बैंक में असिस्टेंट (2010), एस.एस.सी एकाउन्टेंट (2010), एस.एस.सी ऑडिटर (2011 व 2012) और कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से चयन के साथ एकाउन्टेंट के पद पर कार्यरत्त रहे.

अपने लक्ष्य के बारे में बताते हुए रतन दीप ने कहा कि “सिविल सेवा एक कैरियर होने के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम भी है. पहले से ही सरकारी सेवा में होने के कारण सिविल सेवा में व्याप्त चुनौतियों अवं संभावनाओं के प्रति नैसर्गिक रुचि होने का कारण भी मेरा इस ओर झुकाव रहा.”

अपने परिवार का जिक्र करते हुए रतन दीप बोले “मेरे पिता श्री बद्री प्रसाद गुप्ता जी व्यवसायी हैं और मेरी माता श्रीमती गायत्री देवी गृहणी हैं. मेरी छोटी बहन दीपिका सहायक अध्यापिका है और छोटा भाई राजन अध्ययनरत्त है.”

“मेरा परिवार मेरी सफलता की नींव है. आर्थिक, मनोवैज्ञानिक सभी स्तरों पर और कठिन से कठिन और घोर निराशा के क्षणों में भी मेरा परिवार सदैव मेरा उत्साह और आत्विश्वास बढ़ाता रहा.”

शुरूआत में तैयारी योजना पर सलाह प्रारम्भिक स्तर पर निर्माण IAS से मिली. संस्थान के निदेशक कमल देव सर का मार्गदर्शन परीक्षा के प्रत्येक चरण में प्राप्त होता रहा.

पहले प्रयास में अपनी कुछ गलतियों के कारण सफल न हो सका. दूसरे प्रयैस में कुछ स्वास्थ्य संबंधी कारणों से प्रारम्भिक परीक्षा भी पार न कर सका. इसके बाद लगातार तीन प्रयासों में साक्षात्कार स्तर तक पहुँचा और अंततः इस पाँचवे प्रयास में सफल रहा.

मेरे पिता जी हर असफलता के बाद मुझसे कहते थे – “अभी तो अंगडाई है, आगे बहुत लड़ाई है और उनके शब्द मेरा मनोबल बढ़ाते रहे और कुछ देर से ही सही, आखिर सफलता मिल ही गई.

मेरी सफलता में सर्वाधिक योगदान मेरे परिवार, गुरूजनों, मित्रों, सहकर्मियों एवं उन सभी लोगों का रहा जिन्होने मुझसे ज्यादा मेरी क्षमताओं में विश्वास रखा, जिन्होंने लगातार असफलताओं के बावजूद मुझे निराश नहीं होने दिया.

इस प्रयास में सफलता के लिए रतनदीप प्रेरणास्त्रोत मानते हैं अपनी भूतपूर्व सहकर्मी विन्ध्या नूपुर (भारतीय राजस्व सेवा, सिविल सेवा परीक्षा 2016) की सफलता को जिन्होंने अपने परिवार एवं कार्यालय की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बैठा, स्वअध्ययन से सफलता प्राप्त की.

हिन्दी माध्यम के साथ सफलता के बारे में रतन दीप ने कहा कि “सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है लेखन सामग्री की गहराई और प्रस्तुतिकरण न कि लेखन माध्यम. इसके लिए आपको चाहिये तैयारी की एक समुचित रणनीति और बिना विचलित हुए सफलता की आशा के साथ समग्र प्रयास.”

इस बार निर्माण IAS, GS World एवं अन्य कोचिंग संस्थानों में कुछ मॉक इंटरव्यु और अपने मित्रों आदित्य, प्रतीक वायत्य एवं साक्षी इत्यादि के समुह से बेहतर तैयारी कर पाया और अंतिम रूप से चयनित हुआ.

आगामी परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे अभ्यर्थियों को संदेश देते हुए रतन दीप करते हैं कि वर्ष 2014 में मुझे एक गम्भीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा और उस वर्ष मैं प्रारम्भिक परीक्षा भी उत्तीर्ण न कर सका. मैने उसके बाद लगभग यह मन बना लिया था कि मैं अब यू.पी.एस.सी. की तैयारी नहीं करूँगा.

इस स्वास्थ्य समस्या के बाद के प्रभाव आगे कुछ वर्षों तक रहे जिस कारण मैं एक सीमा तक ही मेहनत कर पाता था, फिर भी परिवार एवं दोस्तों के सहयोग से मैंने वर्ष 2015, 2016 और 2017 परीक्षा में साक्षात्कार स्तर तक पहुँचने में सफलता पाई और 2017 परीक्षा में अंततः चयनिय हुआ.

इसलिए आप सभी से कहना चाहुँगा कि जीवन में कैसी भी और कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ क्यों न आ जायें, कभी डरें नहीं और न ही कभी निराश हों.

कोशिश कर हल निकलेगा, आज नहीं तो कल निकलेगा

अर्जुन के तीर सा सध, मरुस्थल से भी जल निकलेगा ।

 

Last Update Monday 8th October 2018     

Read All

Write Comments

About Us

IASPASSION is all about success in Civil Services Examination. With an eye on coveted Indian Administrative Service aspiring youngsters chase their dreams and give their best to achieve success.
We are passionately working on making their journey uncomplicated and enjoyable and our mission is to dispel the myths and wrong notions that surround this big examination.
It is our continuous endeavor to bring in relevant information and inspiring stories that instill confidence and help you persevere as it is a fierce competition that sometimes requires just sticking to the GOAL.

 

The content on this site is IPR property of IASPassion.com and any reproduction of the same, in part or as a whole, will call for legal action under copyright act.

© IASPassion 20018 ---- 2019

IASPassion.com ...Career