निशांत जैन (IAS) द्वारा सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हेतु एक प्रभावपूर्ण मार्गदर्शन

सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के बारे में चिन्ता स्वाभाविक है और किस प्रकार से हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों में नया जोश भरा जाए इस पर मैंने निरन्तर प्रयास जारी रखे हैं.

यह लेखों की श्रृंखला इसी कड़ी में नया प्रयास है जिसमें मैंने हाल के वर्षों में हिंदी माध्यम से चयनित उम्मीदवारों से इस विषय पर चर्चा की और उनके अनुभवों और रणनीतियों को आपसे सांझा करने का प्रयास किया है जिससे आपका मार्गदर्शन हो सके और आप उच्च सफलता प्राप्त करने में सक्षम हो सके.

 

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सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा 2018 से पहले, परीक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश ड़ालने एवं आगामी सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने जा रहे उम्मीदवारों के मार्गदर्शन के लिए उच्च सफलता प्राप्त टापर्स के सुझाव और सलाह आपको अपनी रणनीति बनाने में सहायक रहेंगे.

इस श्रृंखला की शुरूआत में सबसे पहले जिस सफल उम्मीदवार को आपके समक्ष ला रहा हूँ वह हैं आपके चिरपरिचित निशांत जैन जिन्होने सिविल सेवा परीक्षा 2014 में 13वाँ स्थान प्राप्त किया वह भी हिंदी माध्यम से सर्वोच्च स्थान.Mujhe Banna Hai IAS Topper

भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन के बाद भी निशांत जैन सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन देते रहे हैं. उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर बहुचर्चित पुस्तकें मुझे बनना है UPSC टॉपर और “All About UPSC Civil Services Examination”का लेखन भी किया है.All About UPSC

खासकर हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के लिये निशांत एक प्रेरणास्रोत हैं और हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों का मनोबल बढ़ाने हेतु उनके विचार आपके समक्ष प्रस्तुत हैं.

निशांत जैन (रैंक 13, सिविल सेवा परीक्षा 2014)

प्र. इस परीक्षा की अप्रत्याशित प्रकृति को ध्यान में रखते हुए कि कैसे तैयार किया जाना चाहिए ?

निशांत जैन - सिविल सेवा परीक्षा की प्रकृति अनिश्चित है और यह हम सब भलिभांति समझते हुए तैयारी करते है.

सर्वप्रथम, तैयारी शुरू करने से पहले हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को मेरी सलाह होगी कि अपनी ग्रेजुएशन अच्छे से करें और एम्प्लॉयबिलिटी व कौशलों का विकास करें. इससे आप केवल सिविल सेवा परीक्षा में चयन पर ही आश्रित नहीं रहेंगे.

यदि संयोग से चयन न हो सका, तो कैरियर के विकल्प तैयार रखें.

दूसरी महत्वपूर्ण सलाह कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को पंचवर्षीय योजना या जीने-मरने का सवाल न बनाएँ. अपनी रुचि और योग्यता के मुताबिक़ उचित समय पर स्थिति का आंकलन कर आगे बढ़ने या पीछे हटने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए.Nishant Jain IAS

प्र. टापर्स निसंदेह अभ्यर्थियों पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं और सदैव उच्च सफलता हेतु प्रेरणा देते हैं. पर हिन्दी माध्यम से हाल के वर्षों में आपने 13वाँ रैंक प्राप्त किया; वहीं वंदना, प्रियंका, गौरव कुमार, गंगा सिंह राजपुरोहित, शैलेन्द्र सिंह इंदौलिया, अनुराधा पाल, गौरव सोगरवाल जैसे कई टॉपर्स के बावजूद हिन्दी माध्यम के परिणाम बहुत आशाजनक नहीं रहे हैं ?

निशांत जैन – टापर्स की संख्या और कुल चयन की संख्या, दो अलग-अलग बातें हैं. ज़रूरी नहीं, कि कुछ मुट्ठी भर टापर्स से कुल परिणाम बढ़ जाए. आज स्थिति कुछ ऐसी है जहाँ केवल चन्द उम्मीदवार ही मैरिट-लिस्ट में अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाने में सक्षम हो पा रहे हैं जो अत्यंत दुखद है.

हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन पर दृष्टि ड़ालते हुए मैं कहना चाहूँगा कि हिंदी माध्यम के आशाजनक परिणाम न होने के कुछ कारण इस प्रकार हैं:-

अपने माध्यम की भाषा यानी हिंदी पर पकड़ की कमी, अंग्रेज़ी के प्रति डर का भाव, प्रामाणिक अध्ययन सामग्री से दूरी, कोचिंग पर अत्यधिक निर्भरता अथवा अंधानुकरण, अति भावुकता, लक्ष्य पर केंद्रित न रह कर तैयारी को अनिश्चित काल तक आगे बढ़ाते रहना आदि.

हमें आत्म मंथन कर कुछ स्मार्ट तौर-तरीक़े अपनाने की ज़रूरत है.

प्र. आपके अनुसार इस परीक्षा में हिंदी माध्यम ले कर तैयारी करने एवं सफलता प्राप्त करने में रुकावट पिछले वर्षों में प्रणाली में आये परिवर्तन हैं या उम्मीदवारों की सोच ?

निशांत जैन - यदि यह मान भी लिया जाए कि प्रणाली में परिवर्तन ख़राब परिणाम का कारण है, तो भी इस पर समय व्यर्थ न करें.

यदि हम नवीनतम प्रणाली के अनुरूप ख़ुद को ढालें, तो ज़्यादा अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं.Nishant Jain IAS

प्र. हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं - क्या अंग्रेजी का सीमित ज्ञान विचलित कर रहा है या तैयारी को प्रभावित करने के कोई और कारण हैं ?

निशांत जैन - हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को अंग्रेज़ी पर ठीक-ठाक पकड़ की ज़रूरत है, न कि विशेषज्ञता की.

मेरा मानना है कि हम अंग्रेज़ी को हौवा मानना छोड़ें. यह इतनी मुश्किल भाषा नहीं है, जितना हम समझते हैं.

प्र. हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों में कमी कहाँ दिखती है जो वह तैयारी और परीक्षक की सोच के मध्य गैप को भर नहीं पा रहे हैं ?

निशांत जैन - माध्यम कोई भी हो, परीक्षक को कुछ चीज़ें उत्तर में चाहिएँ-

-तथ्यों और विचारों का उपयुक्त समन्वय

- संतुलित दृष्टिकोण

- विचारों/बिंदुओं का क्रमबद्ध और व्यवस्थित प्रस्तुतिकरण

- स्पष्ट और पठनीय प्रस्तुति

- समसामयिक घटनाक्रम के अनुरूप अप-टू-डेट विश्लेषण

हिंदी माध्यम के परीक्षार्थी इन बातों पर ध्यान दें.Nishant Jain IAS

प्र. लोग कहते हैं कि वैकल्पिक विषय में अंक नहीं मिल पा रहे जहाँ तक मैं देख पा रहा हूँ सिविल सेवा परीक्षा 2017 में कई उम्मीदवारों ने 300 +  अंक प्राप्त किये पर फिर भी उच्च स्थान न पा पाये ?

निशांत जैन - 300+ अंक लाने के बाद भी उच्च स्थान न ला पाने का सीधा सा अर्थ है कि उस अभ्यर्थी के अंक अन्य प्रश्न-पत्रों; सामान्य अध्ययन, निबंध अथवा इंटरव्यू में उतने अच्छे अंक न रहे हों.

यदि उच्च रैंक की बात करें, तो वह तभी मिलती है, जब आपके लगभग सभी प्रश्न-पत्रों में औसत से अधिक अंक आएँ.

प्र. क्या आप नहीं सोचते कि हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों ने अपने को केवल कुछ ही वैकल्पिक विषयों तक ही सीमित कर लिया है ?

निशांत जैन - यह बात काफ़ी हद तक सही है; पर ऐसा अकारण नहीं हुआ है.

इतिहास, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान. हिंदी साहित्य, संस्कृत साहित्य, मैथिली साहित्य आदि कुछ ऐसे विषय हैं, जिन्हें हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी पसंद करते हैं क्योंकि इन विषयों में हिंदी में पर्याप्त अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध है.

मेरी व्यक्तिगत राय है कि यदि हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी स्वयं को कुछ विषयों तक सीमित रखकर अच्छे अंक ला रहे हैं, तो इसमें कोई दिक़्क़त नहीं है.Nishant Jain IAS

प्र. इस परीक्षा का सामने करने के लिये क्या तैयारी के शुरू में ही अपने लिये कोई समय-सीमा या प्रयासों की संख्या संबंधी सोच बना लेना हितकर होगा या लक्ष्य प्राप्ति तक प्रयासरत्त रहना चाहिये ?

निशांत जैन - ऐसा ज़रूरी तो नहीं है, पर अपने कैरियर ग्राफ़, आकांक्षाओं और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक अधिकतम सीमा तय कर लेना बेहतर है.

प्र. हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों के समझ चुनौतियाँ और कोचिंग संस्थानों की भूमिका पर आपके विचार

निशांत जैन - मैंने ख़ुद में और अन्य हिंदी माध्यम के साथियों में पाया है कि हिंदी माध्यम के साथी उतने प्रोफ़ेशनल नहीं होते. वे अपने अधिकांश निर्णय भावुकता या आवेग में लेते हैं.

मेरा मानना है कि जब हम तैयारी शुरू करें, तो हमारा लक्ष्य सिर्फ़ स्मार्ट तैयारी कर रैंक लाना होना चाहिए, और कुछ नहीं.

साथ ही यह उचित समय है जब कोचिंग संस्थान भी प्रोफ़ेशनल बनें और परिणाम-उन्मुख तैयारी कराएँ, अभ्यर्थियों को शोधार्थी न बनाएँ.
Nishant Jain IAS

तैयारी का सरलीकृत करें, उसे क़तई जटिल न बनाएँ. यही आपका हिंदी माध्यम के प्रति योगदान हो सकता है.

प्र. अंत में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न: क्या प्रारंभिक परीक्षा पार करना वास्तव में एक चुनौती है क्योंकि कुछ उम्मीदवार कहते हैं कि कभी-कभी यह पूर्णतः भाग्य पर अश्रित है. आपका मत.

 निशांत जैन - इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रारम्भिक परीक्षा पास करना एक चुनौती है; पर इसका परिणाम भाग्य पर आश्रित हो, ऐसा भी नहीं है.

अध्ययन और फिर अभ्यास, यही प्रारम्भिक परीक्षा में सफलता की कुंजी है.

आपकी उच्च सफलता की कामनाओं सहित.

Last Update Sunday 16th September 2018     

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