सही दिशा में निरन्तर मेहनत का परिणाम है यह सफलता; साक्षी गर्ग (रैंक 350 सिविल सेवा परीक्षा 2017)

23 वर्षिय साक्षी गर्ग ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से स्नातक के तुरन्त बाद सिविल सेवाओं में कैरियर बनाने का लक्ष्य रख सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी प्रारम्भ की.

साधारण शैक्षिक पृष्ठभूमि के बावजूद साक्षी ने एक स्वनिर्मित रणनीति के साथ मेहनत और दृण निश्चय दिखा सिविल सेवा परीक्षा 2017 में हिन्दी माध्यम से सफलता अर्जित की है.

साक्षी ने वैकल्पिक विषय के रूप में इतिहास विषय चुना

यह सफलता उन्हें दूसरे प्रयास में प्राप्त हुई.

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राबर्टसगंज (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश) जहाँ सीमित संसाधन ही उपलब्ध हैं साक्षी गर्ग के सपनों की उड़ान को रोक न सका और एक दृण संकल्प दर्शाते हुए साक्षी गर्ग ने सिविल सेवा परीक्षा 2017 में हिन्दी माध्यम से एक शानदार सफलता अर्जित की है और अपने लिए 350 वाँ रैंक सुरक्षित किया है.

सिविल सेवा परीक्षा संबंधी अनुभवों को सांझा करते साक्षी कहती हैं कि "सभी उम्मीदवार इस परीक्षा में सफलता की आशा के साथ आते हैं; फर्क होता है तो केवल अपनी पृष्ठभूमि और तैयारी के स्तर का. पर जो उम्मीदवार इस परीक्षा की ज़रूरतों को समझ जाये और मेहनत करे, उसके लिए सफलता की आशायें बढ़ जाती हैं."

"एक समय आता है जब सभी समतुल्य लगने लगते हैं और जो उम्मीदवार समय रहते तैयारी में बढ़त बना जाये, सफलता उसके कदम चूमती है."

यदि ऐसा न हो तो मेरे जैसी साधारण पृष्ठभूमि के उम्मीदवार तो सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के बारे में सोच भी नहीं सकते.Sakshi-Garg-ias-topper-upsc-350th-rank-cse-2017-hindi-medium

सिविल सेवाओं में कैरियर बनाने के निर्णय के बारे में जिक्र करते हुए साक्षी ने कहा कि “12वीं कक्षा के बाद मेरे समक्ष कई विकल्प थे जिनमें से सिविल सेवा ने मुझे सबसे अधिक आकर्षित किया. यहाँ विविध क्षेत्रों में समाज के साथ जुड़ कर कार्य का मौका मिलता है साथ ही यह एक प्रतिष्ठित सेवा है.”

अपने प्रथम प्रयास में सफल आर्तिका शुक्ल (रैंक 4, सिविल सेवा परीक्षा 2015) से प्रभावित साक्षी के लक्ष्य निर्धारण में उनके पिता का स्वप्न यदि प्रेरणास्रोत्र रहा तो वहीं यह लक्ष्य बना साक्षी की सोच कि सफलता मिले चाहे नहीं पर इस परीक्षा की तैयारी के दौरान एक अनोखे व्यक्तित्व का निर्माण होता है जो शिक्षित युवाओं को तार्किक एवं जागरूक नागरिक बना देता है.

“मेरे परिवार से ही मेरी सफलता है”

अपने परिवार से मिले बहुमूल्य योगदान के बारे में साक्षी ने बताया कि “मेरे पिता जी एक व्यवसायी हैं और माता जी एक ग्रहणी हैं, मेरा भाई अभी अध्ययनरत्त हैं. मेरे परिवार का इस सफलता में बहुत बड़ा योगदान रहा. सभी ने मुझमें विश्वास दिखाया और समय-समय पर प्रोत्साहित किया और सदैव और अच्छा करने के लिए प्ररित किया.”SakshiGarg-ias-topper-upsc-350th-rank-cse-2017

शुरूआत में परीक्षा से जुड़ी जानकारी हेतु कई लोगों का योगदान रहा. सर्वप्रथम मेरे माता-पिता जिन्होने इस क्षेत्र से जुड़े लोगों से बात करके मुझे सही दिशा दी. इसके साथ निर्माण IAS के कमल देव सर और स्वदीप सर का बहुत योगदान रहा. मैने प्रतियोगिता दर्पण में छपने वाले टॉपर्स के साक्षात्कारों के आधार पर अपनी ज़रूरतों के अनुरूप एक रणनीति बनाई और अपने सीनियर्स से भी सलाह ली.

मैने अपना पहला प्रयास सिविल सेवा परीक्षा 2016 में लिया परन्तु मैं प्रारम्भिक परीक्षा उत्तीर्ण करने में असफल रही. हालांकि केवल 0.66 अंक से ही मैं सफलता से वंचित रह गई; पर इससे मुझे समझ आ गया कि अब अपनी तैयारी में मुझे किन क्षेत्रों में कार्य करना है और अपने प्रयास का पुनः विश्लेषण कर तैयारी की और अंतिम सफलता प्राप्त की.

सच में कहूँ तो सही दिशा में निरन्तर मेहनत का परिणाम है यह सफलता.

इस प्रयास में प्रारम्भिक परीक्षा हेतु मैंने समसामयिकी काफी अच्छे तरीके से तैयार की जिसका फायदा प्रारम्भिक परीक्षा के साथ मुख्य परीक्षा में भी मिला. मुख्य परीक्षा में अपने वैकल्पिक विषय और निबन्ध पर अधिक ध्यान दिया.

इसके साथ मैंने उत्तर-लेखन अभ्यास काफी किया था, भाषा पर पकड़ बनाने की कोशिश की थी जिसका लाभ मुझे मुख्य परीक्षा के सभी प्रश्न-पत्रों में मिला और इसी कारण उच्च रैंक प्रप्त कर सकी.

आगामी परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक अभ्यर्थियों को प्रोत्साहित करते हुए साक्षी कहती हैं कि

मेहनत सीढ़ियों की तरह होती है,

और भाग्य लिफ्ट की तरह,

किसी भी समय लिफ्ट तो बन्द हो सकती है

पर सीढ़ियाँ हमेशा ऊंचाई की तरफ ले जाती है.

मेहनत कभी बेकार नहीं जाती.

निश्चिततः इस सफर में बहुत मुश्किलें आती हैं,

कई उतार-चढ़ाव होते हैं,

लेकिन जितना कठिन संघर्ष होता है, जीत भी उतनी शानदार होती है.

इसलिए हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करें.

Last Update Monday 29th July 2019     

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