आत्मविश्वास, अध्ययन में निरन्तरता, सकारात्मक सोच और धैर्य बने अंतिम सफलता के कारक – विजय सिंह गुर्जर (रैंक 574 सिविल सेवा परीक्षा 2017)

विजय सिंह गुर्जर ने वर्ष 2009 में शास्त्री (BA संस्कृत) राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर से करने के पश्चात अपना संघर्ष शुरू किया और एक ‘सिपाही’ के पद से ‘सिविल सेवाओं’ में चयन एक पूरी कहानी बयां करता है.

अपनी मेहनत और असाधारण धैर्य के बल पर विजय सिंह गुर्जर ने सिविल सेवा परीक्षा 2017 में 574वाँ स्थान प्राप्त किया है.

उनका परीक्षा लेखन माध्यम हिन्दी रहा और वैकल्पिक विषय के रूप में उन्होंने अपने विषय संस्कृत भाषा का साहित्य चुना.

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विजय सिंह गुर्जर का ज़मीन से आसमाँ तक का सफर उनके संघर्षों की कहानी कहता है और सिविल सेवा परीक्षा 2017 में 574वाँ स्थान प्राप्त करना किसी उपलब्धि से कम नहीं.

2010 में दिल्ली पुलिस में सिपाही पद से कैरियर की शुरूआत कर विजय का अगला कदम दिल्ली पुलिस में ही उप-निरीक्षक पद पर चयन रहा. फिर अगले वर्ष 2011 में SSC-CGL-2011 में सफलता के साथ केंद्रीय उत्पाद शुल्क तथा सीमा शुल्क में निरीक्षक  और अगली सफलता ने SSC-CGL-2012 के द्वारा आयकर विभाग में निरीक्षक बना दिया.

अपने लक्ष्य की खोज में विजय राज्य सेवा परीक्षा में भी भाग लेते रहे और RAS 2013 (Rank 556) में चयन के साथ सामान्य सुरक्षा अधिकारी (राजस्थान) पद प्राप्त कर सके. फिर RAS 2016 में भी सफल रहे और 456वाँरैंक मिला.

यह और कुछ नहीं एक जुझारू व्यक्तित्व दर्शाता है और कठिन परिस्थितियों का सामना मेहनत और धैर्य के साथ कर विजय ने आगामी उम्मीदवारों के लिए एक मिसाल कायम की है.

यदि मैं अपने लक्ष्य तक पहुँचने में इतना समय लगा और अपने प्रयास निरन्तर जारी रख सका तो इसका सकारात्मक कारण सिर्फ एक था कि मेरे पास वैकल्पिक कैरियर था और मेरे पास पाने को बहुत कुछ था; लक्ष्य प्राप्ति हेतु ज़रूरत थी तो केवल समग्र प्रयास की.

विजय ने सादगी से अपनी कैरियर यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि “दिल्ली पुलिस में सिपाही तथा उपनिरीक्षक के रूप में कार्य करने के दौरान मैंने सिविल सेवाओं में अवसरों को नज़दीक से जाना. मैंने समझा कि समाज, देश तथा वंचित वर्ग हेतु कार्य करने का इससे अच्छा प्लेटफार्म कोई और नहीं. यह एक अच्छे कैरियर के साथ अत्मसंतुष्टि तथा सम्मान दिलवाता है.”

सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के निर्णय के बारे में बताते हुए विजय ने कहा कि “यह पूर्णतः मेरा निर्णय था और सिविल सेवा परीक्षा 2016 में साक्षात्कार तक पहुँचने तक मेरे माता-पिता तक को इस बारे में जानकारी नहीं थी.”

मेरे परिवार में पिता जी श्री लक्ष्मण सिंह, माता जी श्रीमती चन्दा देवी, धर्मपत्नि सुनीता, भाई अजय कुमार तथा तीन बहनें हैं. पिता जी कृषक हैं तथा माता जी एक गृहणी. निराशा की अवस्था में (असफलता पर) परिवार ने सदैव हौंसला बढ़ाया तथा भावनात्मक सहयोग दिया.

आरम्भ के तीन अवसरों में मैं सही मार्गदर्शन के आभाव में प्रारम्भिक परीक्षा भी उत्तीर्ण न कर सका. तत्पश्चात् मेरे मित्र श्री अनिल कुमार (आयकर निरीक्षक) ने सही पुस्तकों का चयन तथा रणनीति बताई. निर्माण IAS के निदेशक कमल देव सर ने प्ररम्भिक, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के दौरान मेरा सही मार्गदर्शन किया.

पहले तीन प्रयासों में असफल रहा; परन्तु, कभी हार नहीं मानी. फिर, 2016 परीक्षा में साक्षात्कार स्तर तक पहुँचा; पर अंतिम सफलता से वंचित रह गया. पर हर प्रयास ने मेरे निश्चय को और बल दिया जिससे मैं निरन्तर परीक्षा की तैयारी में लगा रहा.

इस प्रयास में मैंने एक वर्ष की पूर्ण रणनीति तैयार की जिसमें प्रारम्भ के 5 माह मुख्य परीक्षा, तत्पश्चात् प्ररम्भिक एवं मुख्य परीक्षा और प्ररम्भिक परीक्षा से दो माह पूर्व सिर्फ प्रारम्भिक परीक्षा की तैयारी की.

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु प्रश्न-पत्र हल करना और मुख्य परीक्षा हेतु लेखनाभ्यास लाभप्रद रहा.

पिछले एक वर्ष का करंट अफेयर्स का स्वयं का प्रश्न-पत्र वार नोट्स तैयार करने तथा बार-बार रिविजन करने का सफलता में पूर्ण योगदान रहा. साथ ही वैकल्पिक विषय को अच्छे से तैयार करना और तैयारी में निरंतरता बनाये रखना हितकर रहा.

अपने अनुभवों के आधार पर विजय का मानना है कि अभ्यर्थियों को सिविल सेवा परीक्षा में पूर्ण नियोजन के साथ एक समय-सीमा का निर्धारण कर आना चाहिये.

आगामी परीक्षा में शामिल होने को इच्छुक युवाओं को प्ररित करते हुए विजय करते हैं कि "कक्षा 10 में मात्र 54.5 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाला, हिन्दी माध्यम तथा ग्रामीम पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति जिसने कैरियर की शुरूआत एक सिपाही के पद से की हो वह सफल हो सकता है तो आप क्यों नहीं."

  • परीक्षा के प्रश्न-पत्रों को देखकर पैट्रन को समझें.
  • चयनित तथा सही पाठ्य-सामग्री का चयन करें.
  • ज्यादा सामग्री पढ़ने की आपेक्षा रिविजन पर फोकस करें.
  • आत्मविश्वास रखें, ज्यादा से ज्यादा लेखनाभ्यास तथा प्रारमिभिक परीक्षा स्तर पर प्रश्नाभ्यास करें.
  • नियमित अध्ययन करें (8-10 घंटे)
  • अपनी स्वंय की रणनीति तैयार करें.
  • किसी भी तरह की नकारात्मक बातें, नकारात्मक भावना (माध्यम, पृष्ठभूमि) तथा नकारात्मक व्यक्तियों से स्वंय को दूर रखें.
  • स्वंय को प्रेरित रखें.
Last Update Thursday 18th July 2019     

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