सही सोच से उचित निर्णय ले उसे सही साबित करने हेतु समग्र प्रयास ही, मेरी सफलता का आधार – विकास मीणा (हिन्दी माध्यम से सफल)

जहाँ चारों ओर हिन्दी माध्यम के उम्मीदवार में निराशा और सफलता के प्रति संशय के भाव रहे; वहीं, विकास मीणा (रेंक 568, सिविल सेवा परीक्षा 2017) ने अपना आत्मविश्वास दिखाते हुए सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त की है. यह उनका दूसरा प्रयास था.

विकास अपने पहले प्रयास में भी सफल रहे थे और 881 वाँ रेंक प्राप्त हुआ जिससे उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा में हुआ था और वह अभी ट्रेनिंग कर रहे थे.

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23 वर्षीय विकास मीणा ने राजस्थान के एक छोटे से गाँव महवा से अपना सफर शुरू कर सिविल सेवा परीक्षा 2017 में शानदार सफलता के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त किया है.

विकास ने 10वीं कक्षा तक शिक्षा आदर्श विद्या मंदिर, महवा में प्राप्त की. फिर, 12वीँ कक्षा जयपूर से की. राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक (पास कोर्स - भूगोल, अर्थशास्त्र, लोक प्रशासन) करने के तुरन्त बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी.

सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के निर्णय के बारे में बताते हुए विकास ने कहा, “मेधावी छात्र होने के नाते मेरे पिता जी को मुझसे और मेरे बड़े भाई दोनो से आशाएँ बहुत थीं इसलिये सिविल सेवा परीक्षा को लक्ष्य बना हम बेहतर तैयारी के लिए हम दिल्ली आ गए.

हमारे परिवार के लिये यह एक बहुत बड़ा निर्णय था पर इस निर्णय के कारण मेरे पिता जी की सोच और दूरदर्शिता संशय के घेरे में आ गई थी. पहले भी 12वीं कक्षा के परिणाम के बाद संबंधियो, पड़ौसियों और मित्रों का सुझाव था कि मुझे किसी प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला दिलाया जाये, पर मेरे पिता जी की सोच स्पष्ट थी और उसी के अनुरूप प्रत्येक कदम प्रत्येक उठाया गया.

मेरे सामने अब, आस-पड़ौस, रिश्तेदार और समाज के सामने उनके इस कदम को जस्टिफाई करने की चुनौती थी और साथ ही आईडेंटिटी क्रईसेज़ भी कि शायद मैं कहीं और अच्छा कर सकता था पर गलत जगह भेज दिया गया. आज मैं निश्चिन्त हूँ और ईश्वर की कृपा से मैं अपने पिता जी की बात रख पाने और परिवार का मान बढ़ाने में सफल रहा.

हालांकि जिस समय मैंने तैयारी शुरू की, उस समय सिविल सेवा परीक्षा में हिन्दी माध्यम का परिणाम बहुत खराब रहा था, परन्तु, मैंने इस ओर बिलकुल ध्यान ही नहीं दिया और अपना मस्तिष्क केवल एक चीज़ पर केन्द्रीत रखा कि मेरा चयन किस प्रकार हो सकता है.

और मेरी यही प्रवृति मेरे चयन में निर्णायक भूमिका निभा गई.

शुरूआत में बहुत ड़र सा लगता था. दिल्ली में मुखर्जी नगर का हाल ही कुछ ऐसा है कि चारों ओर लगता था लोग सिर्फ सिविल सेवा परीक्षा की ही तैयारी कर रहे हैं. एक से बड़ कर एक योग्य, धुरंदर और बातें ऐसी कि सामने वाले को सिर्फ बातों से ही हिला दे. कोई अही हाल ही में आया है तो कोई पिछले पाँच वर्षों से इस तिलिस्म को तोड़ने की कोशिश में लगा है.

ऐसे में माता-पिता का प्रोत्साहन मिला कि मैं यह कर सकता हूँ. फिर हम दोनो भाईयों की तालमेल बहुत अच्छी है और तैयारी में हम एक-दूसरे को उत्साहित करते, पढ़ते हुए एक-दुसरे की तारीफ करते, नकारात्मकता को दूर धकेल दिया.

परिवार का सहयोग ऐसा कि एक वाकया सुनाता हूँ - परीक्षा से कुछ दिन पूर्व मेरे पिता जी के हाथ की हड्ड़ी टूट गई. परन्तु उन्होने इस बारे में हमें भनक तक नहीं लगने दी कि इस परीक्षा में तो एक-एक अंक कीमती है हमें पता चला तो ध्यान भटक जायेगा.

तैयारी की रणनीति

मैने लगभग एक वर्ष तक सेल्फ-स्टड़ी कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और परीक्षा के पाठ्यक्रम को ध्यान में रख अपने नोट्स बनाने का क्रम जारी रखा. इन्हें समय-समय पर माडिफाई करता रहा और समसामयकी से बिन्दूवार सूचनाओं को जोड़ता रहा. यह नोट्स अंत में रिविजन के समय बहुत मददगार रहे.

22 वर्ष की आयु में पिछले वर्ष मैने अपना पहला प्रयास लिया जिसमें मेरा चयन भारतीय पुलिस सेवा में हुआ. इस सफलता मे मेरा मनोबल और बढ़ गया और एक नयी रणनीति के अंतर्गत मैंने इस प्रयास में और मेहनत की और वांच्छित सफलता प्राप्त की.

सफलता का श्रेय

परिवार को पूर्णतः सफलता का श्रेय देते हुए विकास कहते हैं, “मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता. बड़े भाई सत्येंद्र मीणा, बहन वंदना मीणा को देना चाहूँगा जिन्होने हर परिस्थिति में मेरा सहयोग किया तथा सदैव मेरे आत्मविश्वास को बनाये रखने में मदद की.“

“इसके साथ ही अपने वैकल्पिक विषय भूगोल में बेहतर मार्गदर्शन के लिये मैं आलोक रंजन सर तथा माजिद हुसैन सर का शुक्रगुज़ार हूँ. साथ ही साक्षात्कार के दौरान मेरे मार्गदर्शन के लिये विकास दिव्यकीर्ति सर, विनय सर, कमल देव सर का शुक्रगुज़ार हूँ. “

मेरी सफलता मेरे ग्रामवासियों की दुआओं का परिणाम है अतः सफलता में उनका बहुत बड़ा हाथ है. मैं अपने मामा राहुल मीना, भाई शिव सिंह मीना, मुनेश मीना को भी बेहतर मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद व्यक्त करता हूँ.

हिन्दी माध्यम से सफलता के बारे में

विकास का मानना है कि हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों में डर सा है, भ्रम है कि आयोग हिन्दी के खिलाफ है जो बिलकुल गलत धारणा है. हम शायद समझ नहीं पा रहे हैं और संशय हमारी सफलता में सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न कर रहा है.

मैं पूर्णतः हिन्दी माध्यम का उम्मीदवार हूँ और स्नातक परीक्षा के तुरन्त बाद तैयारी में लग गया. पारिवारिक पृष्ठभूमि भी कुछ ऐसी नहीं जो मैं सीखा-सिखाया आया था. शुरूआत में मेरे पास था तो केवल आत्मविश्वास और कुछ कर दिखाने का हौसला.

मेरी सफलता आपके लिये एक उदाहरण है कि यदि मेरे जैसे साधारण युवा सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकता है तो कोई भी यह कर दिखाने में सक्षम है.

ज़रूरत है तो सिर्फ और सिर्फ मेहनत और आत्मविश्वास की.

 

On Sunday 16th September 2018     

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