अपनी गलतियों से सबक सीख अंततः सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सका, आदित्य (हिन्दी माध्यम से सफल)

(Learning from my mistakes, I could improve and succeed in Civil Services Examination says, Aditya (Success with Hindi Medium))

राजस्थान के 25 वर्षीय आदित्य (रेंक 630, सिविल सेवा परीक्षा 2017) ने सिविल सेवा परीक्षा 2017 में शानदार सफलता प्राप्त की है. अपने प्रयासों में आदित्य ने वैकल्पिक विषय के रूप में इतिहास को चुना.

आदित्य की पूरी शिक्षा हिन्दी माध्यम से रही और वह अपने चौथे प्रयास में सफलता सुनिश्चित करने में सफल रहे.


 By:      On Monday 21st May 2018     

राजस्थान के एक छोटे से गाँव अजीतपुरा के आदित्य ने सिविल सेवा परीक्षा 2017 में हिन्दी माध्यम से सफलता प्राप्त करने का गौरव प्राप्त किया है.

बड़ी सादगी से अपनी कैरियर यात्रा के बारे में बताते हुए आदित्य ने कहा, “मेरी पूरी शिक्षा हिन्दी माध्यम से रही और ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण सीमित कैरियर विकल्प ही नज़र आ रहे थे. पर कैरियर की दिशा तो सिविल सेवाओं की ओर थी और इसका सबसे बड़ा कारण मेरे पिता की इच्छा रही.”

मेरे पिता जी ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की थी और उन्ही की प्ररणा से मैंने सिविल सेवाओं में कैरियर बनाने का मन बनाया.

आदित्य अपनी सफलता में परिवार के बारे में बताते है, मेरे परिवार में पिता जी प्राध्यापक हैं और माता जी शिक्षिका मेरी छोटी बहन MBBS की तैयारी कर रही है.

मेरी प्राइमरी शिक्षा अजीतपुरा गाँव (तहसील भादरा, जिला हनुमान गढ़, राजस्थान) के सरकारी स्कूल से रही तथा बाकी शिक्षा तहसील मुख्यालय भादरा से हिन्दी माध्यम से की. तहसील मुख्यालय भादरा से ही स्नातक परीक्षा (2010-2013) पास की. इस क्रम में इतिहास, राजनीति विज्ञान और भूगोल विषय पढ़े.

मध्यम-वर्गीय परिवार की सोच के अनुरूप मैंने कैरियर की स्वभाविक चिन्ता और एक विकल्प सुनिश्चित करने को ध्यान में रख बी.एड. भी किया.

इस क्रम में मैं विशेष रूप से मोहन लाल जी (RAS) के योगदान का भी उल्लेख करना चाहुँगा जिनसे मुझ प्रेरणा मिली.

सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने का निर्णय ले स्नातक के तुरन्त बाद तैयारी की शुरूआत की और दिल्ली आ गया. अपने विषयों में से मैंने इतिहास को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना.

2013 में जब तैयारी शुरू की उस समय हिन्दी माध्यम के प्रति नकारात्मक माहौल सा था. पर सफलता की आशा के साथ मैने तैयारी प्रारम्भ की. मैं भाग्यशाली रहा कि मुझे एक ऐसा मित्र समुह मिला जिसने मेरी सफलता में एक बड़ा रोल निभाया.

मेरे मित्र-समुह में सुरेन्द्र लाम्बा (IPS; CSE 2014), राजेन्द्र पनेसिया (IAS; CSE 2015) और मनीश गुरवानी (IAS; CSE 2016) में सफल रहे और इस वर्ष मैं भी सफलता का स्वाद चख सका.

एक वर्ष की तैयारी के साथ मैंने अपना प्रथम प्रयास सिविल सेवा परीक्षा 2014 में लिया, पर प्रारम्भिक परीक्षा पार न कर सका. दूसरे प्रयास (2015 परीक्षा) में मैने साक्षात्कार दिया परन्तु अंतिम सफलता से वंचित रह गया. पर इसका असर यह रहा कि मैं जब अपने तीसरे प्रयास के लिये (2016 परीक्षा) तैयारी कर रहा था तो थोड़ा हवा में था, कुछ घमण्ड़ सा आ गया था पिछले प्रयास में साक्षात्कार स्तर तक पहुँच कर और इसका नकारात्मक असर मेरे निष्पादन में स्पष्ट दिखा और मैं मुख्य परीक्षा पास करने में असमर्थ रहा. मेरे लिये सबसे बड़ा झटका निबन्ध प्रश्न-पत्र में लगा जिसमें मुझे केवल 118 प्राप्त हुए तथा वैकल्पिक विषय में प्राप्तांक 241 साधारण ही थे.

मैं एक बार फिर धरातल पर था और अपनी गलतियों से सबक सीख अपने चौथे प्रयास में जुट गया. इस समय मेरे परिवार और मित्रों के प्रोत्साहन ने मुझे दुबारा से आत्मविश्वास प्राप्त करने में मदद दी. मुझे अपने आप पर विश्वास था कि मैं इससे कहीं बेहतर कर सकता हूँ. और इस प्रयास में अंततः सफलता प्राप्त कर सका.

अच्छे मित्रों का समुह वास्तव में आपको तैयारी की सही दिशा दिखाता है और यदि एक मार्गदर्शक मिल जाये तो राह और आसान हो जाती है. मैं भाग्यशाली रहा कि मुझे निर्माण आई.ए.एस. के कमल देव सर का सहयोग प्राप्त हुआ जो आज भी जारी है.

हिन्दी माध्यम से सफलता के बारे में आदित्य का मानना है कि यब डर और कुछ नहीं केवल भ्रम है. कई लोगों की सोच ऐसी बन गई है कि अब हिन्दी माध्यम से सफलता कठिन हो चली है जबकि यह बिलकुल गलत सोच है.

जब तक हिन्दी माध्यम के उम्मीदवार संघ लोक सेवा आयोग की सोच को ठीक से समझेंगे नहीं, तब तक हिन्दी माध्यम से सफलता में कठिनाईयाँ आती रहेंगी.

हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों के साथ अपने अनुभव सांझा करते हुए आदित्य कहते हैं, सिविल सेवा परीक्षा हमारे लिये एक चुनौती है और इसका डट कर सामना करना है. अभी मैंने आंशिक सफलता प्राप्त की है और अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए मैं भी प्रयासरत्त हूँ और आपसे सफलता के लिये एक उच्च प्रयास की आशा रखता हूँ. यदि थोड़ा और प्रयास हम ड़ाल दें तो वांच्छित सफलता हमसे दूर नहीं.

 

Last Update Monday 21st May 2018

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