सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हेतु उठायें कुछ बड़े कदम

सिविल सेवा परीक्षा में हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों के प्रदर्शन और इस विकट स्थिति से कैस बाहर आया जाये इस पर पिछले दो लेखों के बाद, इस लेख में उम्मीदवारों को वांच्छित सफलता हेतु क्या कदम उठाने चाहिये इस पर चर्चा कर रह हूँ.

परिस्थितियाँ इतनी विकट हैं कि कुछ लोगों ने सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम का अंत सा मान लिया है. मानता हूँ कि असफलता तोड़ देती है और नकारात्मकता चारों ओर से धेर लेती है जिससे आपकी सोच तक प्रभावित हो जाती है. परन्तु, मैं सदैव आशावादी रहा हूँ और पूरे विश्वास से कह रहा हूँ कि पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्तों, हिंदी माध्यम वापसी करेगा और जम के करेगा. सब्र का पैमाना छलकने न दें. सफलता की कामना के साथ प्रयास करें और लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पित रहें.

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सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के लिये मूलतः तीन चीज़े आधार है – साहस (Courage), प्रतिभा (Capability) और प्रतिबद्धता (Commitment).

सामान्यतः, उम्मीदवारों की तैयारी की शुरूआत जोश के साथ होती है और जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, सही राह मिलने लगती है जिससे आत्मविश्वास बढ़ता जाता है. पर परीक्षा की समयावधि लम्बी है और असफलता इसे और बड़ा देती है और ऐसे में जो गुण आपके काम आयेगा वह है – धैर्य.

सभी गुणों को पूर्ण रूप से दर्शाते हुए इस वर्ष भी हिन्दी माध्यम से सर्वोच्च स्थान प्राप्त उम्मीदवार अनिरुद्ध कुमार (रेंक 146, सी.एस.ई. 2017) व कई अन्य उम्मीदवारों ने साहस और धैर्य दिखाते हुए पूर्ण समर्पण के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त किया.

सफलता का रहस्य

अपनी सफलता के समाचार को सांझा करते हुए अनिरुद्ध कुमार (रेंक 146, सी.एस.ई. 2017) ने फेसबुक पेज पर किये अपड़ेट पर आपका ध्यान आकृषित करना चाहुँगा.

जीवन की अबतक की सबसे बेहतरीन उपलब्धियों में से एक संघ सोक सेवा आयोग 2017 परीक्षा में 146वाँ रेंक.

‘The Alchemist’ के लेखक पाउलो कोएलो की एक पंक्ति है आसमान की तरफ देखिये, आप अकेले नहीं हैं, आप जो भी सपने देखते हैं और उसे पूरा करने के लिये जो मेहनत करते है, उसका प्रतिफल देने की साजिश यह पूरी कायनात करता है.”

कुछ ऐसी ही साजिश ईश्वर ने मेरे माता-पिता, मेरी धर्मपत्नि (आरती सिंह, IPS), मेरे दोस्तों और मेरे गुरूओं (विकास दिव्यकृति सर, धर्मेन्द्र सर, विनय सर, कमल देव सर आदि) के साथ मिल कर की.

यह शब्द देख मैं प्रभावित हुआ साथ ही विसमित भी और मुझे यह समझने में समय नहीं लगा कि अनिरुद्ध की ज्ञान और भाषा के स्तर पर पकड़ शायद यह उनकी सफलता में भी अवश्य सहायक रही होगी.

जी हाँ; मैने अपना पिछले लेख में इन्हीं दो चीजों का जिक्र किया था - ज्ञान वर्द्धन और भाषा बेहतर करने के प्रयास के बारे में.

ज्ञान वर्द्धन- सर्वोपरि

सिविल सेवा परीक्षा की प्रणाली में शामिल विभिन्न प्रश्न-पत्रों के पाठ्यक्रम में कई विषयों से संबंधित तैयारी के लिये पुस्तकों और अध्ययन-सामग्री का चयन शुरूआती कदमों में से एक है.

इसका सीधा मतलब है पाठ्यक्रम में शामिल विभिन्न प्रश्न-पत्रों और उनके अवयवों की तैयारी के लिये चाहिये ऐसी पुस्तकें और पाठ्य-सामग्री जो आधारभूत ज्ञान दें.

विषय की समझ और अवधारणाओं की नींव पर ज्ञानवर्द्धन के लिये आपको चाहिये मानक पुस्तकें जो विषय-वस्तु पर पकड़ दे सकें. साथ ही न्यू मीड़िया के साथ जानकारियों को अद्धतन करने की भरपूर कोशिश.

और फिर आता है, भाषा के स्तर पर ‘The Alchemist’ जैसी प्रेरणादायक किताबों का योगदान - जीवन को समझने, प्रेरणा लेने, लक्ष्य स्थापित करने और उसे प्राप्त करने हेतु प्रयास करने में और सोच बदलने में.

प्रेरणादायक पुस्तकें - बदलाव और विविधता आपके बौद्धिक विकास और उत्थान में सहायक

ऐसी पुस्तकें पढ़ने के लिये अपनी अध्ययन रणनीति में अलग से समय रखें या नहीं यह निर्णय समय की उपलब्धता को ध्यान में रख कर करें. वैसे भी जब-जब गम्भीर तैयारी में पाठ्य-पुस्तकें पढ़ते थक जाये, मन इधर-उधर हो, उस समय का सदुपयोग कर ऐसी पुस्तकें पढ़ने का उत्तम समय है.

वैसे भी इस प्रकार की पुस्तकें आप आनन्द के लिये कुछ हल्के माहौल में पढ़ते है. इनकी रोचकता और धटनायों आपको बाँध कर रखती हैं, आपकी एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है और साथ ही कल्पना शक्ति विकसित होती रहती है.

ऐसी पुस्तकें पढ़ आपमें सकारात्मक ऊर्जा का संचालन होता है साथ ही भाषा भी बेहतर होती जाती है, वुकेबलरी बढ़ती है. नये शब्द तो मिलते ही हैं, साथ ही शब्दों के सही उपयोग का भी पता चलता है, जो सिविल सेवा परीक्षा में आपके प्रयास को सार्थक बनाने में भरपूर योगदान दे सकता है.

साहित्य समाज का आइना होता है और जितनी अधिक इस प्रकार की ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ेंगे, उतनी ही वैचारिक सोच विकसित होती चली जायेगी.

लक्ष्य बनायें प्रथम प्रयास में ही सफलता

ज्ञान प्राप्ति के लिये विशेष प्रयास उम्मीदवार प्रायः अपने प्रथम प्रयास में करते हैं और धीरे-धीरे समझ का स्तर ऐसा बन जाते है कि पढ़ाई और परीक्षा में एक समन्वय सा स्थापित हो जाता है. प्रत्येक वर्ष, ऐसे कई उम्मीदवार 22-23 वर्ष की आयु में ही सफलता प्राप्त कर लक्ष्य प्राप्त कर जाते हैं.

दूर क्यों जाये, इस वर्ष की परीक्षा में हिन्दी माध्यम से सफलता द्वारा संभवतः आई.ए.एस. पद पाने वाले 23 वर्षीय विकास मीणा (रेंक 568, सी.एस.ई 2017) से प्रेरणा लें. पिछले वर्ष भी अपने पहले प्रयास में ही विकास ने सफलता प्राप्त की थी पर, तब उन्हें IPS मिला था.

एक ओर, विकास जैसे हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों; वहीं दूसरी ओर हिन्दी माध्यम के अधिकांश उम्मीदवार 4-5 प्रयास के बाद भी सफलता से वंचित रह जाते है. क्या है इसका कारण ?

मैं जितना समझ पा रहा हूँ यह कारण है पढ़ाई और सिविल सेवा परीक्षा के बीच समन्वय न बैठा पाना. आपके लिये आवश्यक है कि शुरूआत से ही परीक्षा के स्तर को ध्यान में रखते हुए अपने ज्ञान और कौशल के आधार पर तैयारी करें.

द हिन्दू पढ़ने की ही सलाह क्यों ?

आप जरा समझें; मैं क्या, अनेक टॉपर्स तथा विशेषज्ञ भी द हिन्दू पढ़ने की ही सलाह क्यों देते हैं. कोई शक नहीं कि हिन्दी में कई स्तरीय सामचार-पत्र उपलब्ध हैं पर जो सोच, दृष्टिकोण और विशलेष्ण द हिन्दू या इंडियन एक्सप्रेस पढ़ने से मिलता है वह हिन्दी समाचार-पत्रों से पूर्ण रूप से भिन्न है, पर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में अत्यन्त उपयोगी है.

मैंने जो पुस्तक रहित परीक्षा का जिक्र पिछले लेख में किया था इसका आश्रय था यह मत समझ लेना कि पुस्तकों की अब आवश्यकता ही नहीं. कहने का तात्पर्य है कि संचित ज्ञान और जागरुकता के आधार पर जो पढ़ें उसे समझें और समाचार-पत्रों दी गई सूचनाओं को आपस में रिलेट कर सकें.

हमारे कई कोचिंग संस्थानों ने हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिये पाठ्यक्रम से संबधित पाठ्य-सामग्री और संसाधन जुटा देने का सराहनीय कार्य किया है. कुछ विशिष्ट पत्रिकाओं तथा द हिंदू’ जैसे समाचार-पत्रों से परीक्षोपयोगी लेख ले उनके अनुवाद प्रस्तुत किये हैं.

पर यह कदम कितना कारगर सिद्ध हुआ इसका अंदाजा उम्मीदवार खुद ही लगा सकते हैं.

कोचिंग संस्थान के त्वरित नोट्स, सारांक्ष या कुछ एक अनुवादित लेख क्या ‘द हिंदू’ जैसे समाचार-पत्र पढ़ने का स्थान ले सकते हैं ?

इन सभी कोचिंग संस्थानों ने यह कार्य अच्छी सोच के साथ किया, परन्तु इस कदम का असर हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों पर जहाँ अच्छा होना चाहिये था, हुआ उसके बिलकुल विपरीत.

उम्मीदवारों के बीच कुछ ऐसा संदेश पहुँचा जिससे कि उम्मीदवारों को लगा, यह तो सफलता की कुँजी हाथ लग गई है. भगवान जाने, उम्मीदवारों को यह लगने लगा या ऐसा उन्हे समझा दिया गया कि सब कुछ तो कोचिंग संस्थान परोस ही देगा, और उन्हें अपनी ओर से पाठ्य-सामग्री और संसाधन हेतु प्रयास करने की अवश्यकता ही क्या है?

यह सबसे बड़ा कारण है जिसकी वजह से लगता है कि हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों में शायद संतोष और आत्मतुष्टि की भावना आ गई है. इसका दुष्प्रभाव यह रहा कि हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों की तैयारी में एक शिथिलता सी आ गई है और ऐसे हिंदी माध्यम के अधिकांश उम्मीदवार परीक्षक की आपेक्षाओं से दुरी लगातार और बढ़ाते जा रहे हैं.

सिविल सेवा परीक्षा में वांच्छित सफलता के लिये कोई छोटा रास्ता है ही नहीं, यदि तैयारी में शार्ट-कट मारने का प्रयास करेंगे तो परीणाम जो आयेगा है वह हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों मेंपिछले वर्षों में स्पष्ट दिख भी रहा है.

जहाँ परीक्षा की ज़रूरत विस्तृत ज्ञान की हो, ऐसी स्थिति में शुरूआत से ही यदि हम तैयारी के समय ही अपने ज्ञान की सीमायें बाँध दें और शुरू से ही चयनात्मक अध्ययन की आदत ड़ाल लें तो आप अपने ज्ञान को संकुचित कर एक सीमित दायरे में बाँध रहे हैं.

ऐसी स्थिति आपको सिविल सेवा परीक्षा में सफलता तक ले जाये, इसकी संभावनायें नगण्य ही लगती हैं.

हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के लिये कोचिंग कितनी कारगर

बदलते समय में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में उम्मीदवार कोचिंग संस्थानों की ओर मुड़े हैं. उम्मीदवारों के लिये कई ज़रूरते नई थीं, फिर भीष्ण प्रतियोगिता में अपने को आगे लाने की लालसा में ऐसे लगता है कि हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों ने तो कोचिंग संस्थानों के आगे आत्मसमर्पण सा कर दिया है.

सच कहूँ तो सिविल सेवा परीक्षा में 2011 और फिर 2013 के बदलावों के कारण हिंदी माध्यम के कोचिंग संस्थानों के सामने ऐसी चुनौतियाँ पेश की हैं जिनके फलस्वरूप दिल्ली और खासकर मुखर्जी नगर, इलाहबाद, जयपुर जैसे बड़े सेंटरों में अच्छी खासी हलचल पैदा कर दी है.

सामान्य अध्ययन की तैयारी में तो गज़ब स्थिति है जहाँ विभिन्न अवयवों हेतु विषय विशेषज्ञ समुह के साथ नये-नये प्रयोग जारी हैं. हर वर्ष नयी टीम या फिर टीम में बदलाव के साथ उम्मीदवारों को नये सिरे से लुभाने की प्रक्रिया निरन्तर जारी है.

जहाँ यू.पी.एस.सी. पाठ्यक्रम में स्पष्ट सामान्य जानकारियों और जागरुकता की आपेक्षा रख रहा है तथा प्रश्न-पत्रों में कलात्मकता और नवाचार द्वारा विषयों में और दूसरे विषयों में अंतरसंबंध से विषयों की सीमाओं को धुंधला कर रहा है. यह देख लगता है कि शायद अभी भी परीक्षा की ज़रूरतों से समन्वय बन नहीं पा रहा है.

स्वीकार करता हूँ कि कुछएक स्थापित कोचिंग संस्थानों ने कई अपनी ओर से निरन्तर बेहतरीन प्रयास किये हैं और हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के मार्गदर्शन हेतु कई कार्यक्रम शुरू भी किये हैं और हजारों उम्मीदवारों की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में योगदान दिया है. कई सफल उम्मीदवार इन कोचिंग संस्थानों को अपनी सफलता का श्रेय देते भी हैं.

पर जिस बड़ी संख्या में हिंदी माध्यम के उम्मीदवार कोचिंग संस्थानों से सहायता प्राप्त कर रहे है उस अनुरूप सामने आ रहे हिंदी माध्यम के परीणाम अजब स्थिति पैदा कर रहे है.

बड़े-बड़े क्लास रूम, कई सौ छात्रों की कक्षायें, नई तकनीक का प्रयोग, सब कुछ; पर उम्मीदवारों के साथ जुड़ाव में कहीं दूरी आ रही है जो उनके निष्पादन को प्रभावित कर रही है.

सिविल सेवा परीक्षा की कोचिंग में सूचनाओं को उम्मीदवारों तक पहुँचाने भर से काम नहीं चलेगा. सिविल सेवा परीक्षा में संघ लोक सेवा आयोग की सोच के अनुरूप उम्मीदवारों को उपलब्ध सीमित सूचनाओं के आधार पर प्रश्न-पत्र हल करने की माहरत दिलानी ही होगी.

वैसे मैं मानता हूँ कि इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों को भी अपना पूर्ण सहयोग और कड़ी मेहनत के लिये प्रतिबद्धता दिखानी होगी.

आशा करता हूँ कि आने वाले समय में स्थितियों में सुधार होगा और कोचिंग संस्थानों को उभरती स्थितियों में अपनी सोच को कुछ और तराशना होगा जिससे हिंदी माध्यम के उम्मीदवार लाभान्वित हों और उच्च परीणाम प्राप्त कर सकें.

प्रारम्भिक परीक्षा – यहाँ चुनौतियाँ विकट हैं

सिविल सेवा परीक्षा एक बड़ी परीक्षा है और कठिन भी. हाल के वर्षों में हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के लिये प्रारम्भिक परीक्षा में सफलता पाना मानो कठिन हो चला है.

इसका सामना आपको करना ही है – सबसे पहले तो सभी डर निकाल दें और आत्मविश्वास के साथ प्रारम्भिक परीक्षा की तैयारी करें.

तैयारी की शुरूआत में आपको आधारभूत जानकारियों की नींव पर ज्ञानवर्द्धन करते हुए जागरुकता और सामान्य समझ के उपयोग से छोटे-छोटे कदमों के साथ, अधिक से अधिक जानकारियाँ समेट परत पर परत बनानी हैं जिससे आपकी स्मरण क्षमता विकसित हो और इसका उपयोग आप समय आने पर कर सकें.  

प्रारम्भिक परीक्षा - अपने रचनात्मन कौशल के साथ विशिष्टता का प्रदर्शन दे कर ही सफलता की आशा की जा सकती है

इस परीक्षा के प्रत्येक स्तर पर ऐसी स्थितियाँ आयेंगी जहाँ ज्ञान और जागरुकता तो काम आयेंगे ही; पर साथ ही कहीं सूझबूझ से, कुछ अनुमान लगा, कहीं अटकलें लगा, तो कभी अंदाज़े से, कभी किसी मुद्दे पर शीघ्र राय बना, किसी संकेत को भांपने से उत्तर बना देने में और कभी दी गई सूचनाओं के आधार पर निर्णय लेने से आप सही उत्तर दे पाने की स्थिति में होंगे.

आपको परीक्षा से पूर्व अपनी तैयारी को एक ऐसे स्तर पर ले जाना है जहाँ आप पूरे आत्मविश्वास के साथ तैयारी का सामना कर सकें.

मुख्य परीक्षा - अपनी लेखन-शैली पर भी कार्य करें

मुख्य परीक्षा में आपके सामने चुनौती है कि आप अपने ज्ञान को कितने प्रभावी ढ़ग से परीक्षक के सम्मुख प्रस्तुत कर पाते हैं.

अध्ययन प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ना तो ज़रूरी है ही साथ ही आपको अपनी लेखन-शैली पर भी कार्य करना चाहिये. जो पढ़े उसके बारे में और जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हो जिससे आप कुछ अन्य पढ़ने को प्रेरित हों, यह एक चक्र सा है.

जितना आप पढ़ेंगे, उतने आपके विचार स्पष्ट होते जायेंगे और इसका सीधा असर आपके लेखन में दृष्टय होगा.

परीक्षक जहाँ आपकी समझ, तार्किक क्षमता, सूचनाओं में समन्वय और प्रसंगिक उत्तर में आपके प्रस्तुतिकरण पर ही आपको अंक प्रदान करता है तो इस दिशा में कार्य करना अति आवश्यक है.

जब आप लेखन-अभ्यास करते हैं आपको सही शब्दों का सही जगह उपयोग, यादाशत के सहारे जो पढ़ा या सुना है उससे त्वरित ज्ञान, सूचनाओं को सही क्रम देने या यूँ कहिये कि एक-दूसरे से जोड़ने की कला, प्रभावी प्रस्तुतिकरण, सूचनाओं में समन्वय और लेखन-प्रवाह बेहतर होता जाता है.

आप एक बार उत्तर लिखते हैं फिर उसी को जब कुछ समय बाद दुबारा लिखते हैं तो लेखन में निखर तो आता ही है, नवीन जानकारियों का समावेश कर विश्लेष्णात्मक लेखन आपके प्रयासों को सार्थक करने में मदद करेगा.

इस अभ्यास से आपको समय प्रबंधन में भी सहायता मिलेगी – तैयारी करते समय और परीक्षा भवन में भी.

समय है एक बड़ा कदम उठाने का

और अंत में एक निवेदन – सिविल सेवा परीक्षा में आपकों अनेक निर्णय स्वयं लेने होते हैं और परीक्षा में कब शामिल होना है यह एक बड़ा कदम है जो पूर्णतः आपका निर्णय है.

जब आपके पास आयु / प्रयासों की सीमा है, तो अपने प्रयास यूँ व्यर्थ न करें.

सटीक तैयारी के लिये पूर्ण समय दें और जब पूर्ण आश्वस्त हों, प्रयास ले. सकारात्मक सोच के साथ तैयारी में निरन्तरता बनाये रखें और सदैव अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयत्न करें.

आपकी सफलता की शुभकामनाओं सहित !

 

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Last Update Tuesday 12th June 2018     

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