हिन्दी माध्यम से सिविल सेवा परीक्षा में सफलताः सदैव कुछ नया सीखने को तत्पर रहें

मेरे पिछले लेख सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम का प्रदर्शन और इसका भविष्य पर मिले अनेक संदेशों और प्रतिक्रियाओं का स्वागत और कुछ सफल उम्मीदवारों ने इसे सोशल मीड़िया पर सांझा भी किया इसके लिये आप सभी का धन्यवाद.

इसमें अधिकांश लोगो ने हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों को इस परिस्थिति से सामना करने हेतु मार्गदर्शन और उन्हे क्या करना चाहिये, इस पर प्रकाश ड़ालने का सुझाव दिया.

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हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं का परीक्षा लेखन माध्यम के रूप में लागु हुए इतना समय बीत गया पर एक ड़र जो हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों को सताता रहता है वह है क्या अंग्रेजी भाषा ज्ञान के बिना तैयारी सम्भव है ?

जब से मैं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ा हूँ एक तर्क जो लगभग तीन दशक पहले भी सुनता था, वही आज भी हिंदी माध्यम के उम्मीदवार की सफलता में बड़ी अड़चन है.

यह तर्क है - अंग्रेजी पढ़ने या समझने में समस्याओं के कारण अधिकांश हिंदी माध्यम के उम्मीदवार द हिंदूजैसे समाचार-पत्र चाहकर भी नहीं पढ़ पाते. या पढ़ते भी हैं तो अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों की अपेक्षा उन्हें उसमें इतना अधिक समय लगता है तैयारी की पूरी रणनीति ही चौपट हो जाती है.

यह सोच तो पहले भी थी जब लगभग आधे उम्मीदवार हिंदी माध्यम अथवा अन्य भारतीय भाषाओं से सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुआ करते थे पर क्या आज भी यह स्थिति यथावत है - नहीं. पहले सफलता अधिक दृष्टय थीं, परन्तु अब स्थिति क्या है हम सब जानते हैं.

अधिकांश उम्मीदवारों के साथ ऐसा नहीं है कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती बल्कि इस स्थिति को कुछ ऐसे समझिये कि एक जिद्द सी है. आज यह कह पीछा छुटा लेना कि अंग्रेजी पढ़ना हमें ठीक से आता नहीं और हम चाहते भी नहीं.

यदि ऐसा है तो अपना कीमती समय सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में व्यर्थ न करें और किसी और कैरियर में भविष्य तालाशें.

अंग्रेजी भाषा में चाहिये निपुणता या एक व्यवहारिक ज्ञान

सर्वप्रथम यह जान लें कि समाचार पत्र पढ़ना सिविल सेवा की तैयारी का एक अनिवार्य अंग है. इसी ज़रूरत को पूरा करने के लिये एक नई भाषा सीखने के क्रम में आप यदि कुछ समय अंग्रेजी भाषा को दे दें, तो हर्ज ही क्या है.

भाई कौन कह रहा है कि आप अंग्रेजी भाषा में निपुणता हासिल करें. आप अंग्रेजी भाषा का व्यवहारिक ज्ञान तो रख ही सकते हैं. आपको तो केवल अपना काम ही चलाना है. अंग्रेजी भाषा के ज्ञान के आभाव में ऐसा न हो कि आप मानक पुस्तकें पढ़ने और द हिन्दू और इंड़ियन एक्सप्रेस जैसे समाचार-पत्रों, कुछ प्रेरणादायक पुस्तकें जो आपको अवश्य पढ़नी ही चाहिये, का फायदा उठाने से वंचित न रह जायें.

मानता हूँ कि अंग्रेजी आपकी पहली भाषा नहीं रही है पर उत्तर भारत के छोटे शहरों, गाँवों तथा कई सरकारी स्कूलों से पढ़ कर आ रहे अधिकांश विद्यार्थियों के साथ भी स्थिति तो एक ही है और आप अकेले नहीं जो इस कठिनाई का सामना कर रहे हैं.

मौजूदा संदर्भ में क्या यह सही है ? शायद नहीं.

वर्ष दर वर्ष, हमारा देश तरक्की की राह पर है. बिमारऊ प्रदेश कहे जाने वाले राज्यों में जिस तेजी से प्रगति हुई है, उससे बहुत बड़ा बदलाव आया है.

पर विडम्बना देखिये, सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम के उम्मीदवार जो अधिकांश इन्ही राज्यों से आते हैं, उनका प्रदर्शन उल्टी दिशा में चल रहा है.

समय बदला और आज हिन्दी माध्यम के विद्यार्थी हर क्षेत्र में, यहाँ तक की इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य प्रोफेशल कोर्सेज़ कर रहे हैं और अपनी इन्ही डिग्रीयों के आधार पर शानदार कैरियर बना रहे हैं.

अब आप क्या यह कहेंगे कि इन डिग्रीयों के प्राप्त करने के क्रम में  आपका अंग्रेजी भाषा से वास्ता बिलकुल पड़ा ही नहीं ?

यही डिग्रीयाँ सभी हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों को सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने की पात्रता भी दे रही हैं. पर प्रश्न जब सिविल सेवा परीक्षा की गंभीर तैयारी का आता है तो भड़चाल स्पष्ट दृष्य है कि हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के लिये अब यह परीक्षा कठिन हो चली है.

हाँ, मानविकी विषयों के उम्मीदवारों के लिये यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है, पर जैसा देखने में आता हेै यदि इरादे बुलन्द हैं तो ऐसा कुछ नहीं जो आप पा न सकें. निरन्तर अभ्यास करते रहने से चट्टाने तक हिल जाती हैं. 

हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों की सफलता में सबसे बड़ी बाधा क्या है ?

मैं तो हमेशा से मानता रहा हूँ और बेधड़क लिखता भी हूँ कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में अधिकांश उम्मीदवारों का आधार प्रचलित धारणायों (Prevalent Perceptions) पर टिका रहता है. बिना सोचे समझे, आँखें बंद कर बस जो हो रहा है उसका अनुसरण कर लें.

दुसरों का अनुसरण कर आप जो कदम उठा रहे हैं वह कितना कारगर हैं या नहीं इसका अंदाजा होते होते बहुत देर हो चुकी होती है. इससे नुकसान केवल आपका है.

संघ लोक सेवा आयोग ने हाल के वर्षों में जो रचनात्मकता और नवाचार का पुट ड़ाल, सिविल सेवा परीक्षा के साथ जो अभिनव प्रयोग किये हैं उसके चलते प्रश्न-पत्रों का स्वरूप ही बदल गया है और उभरती ज़रूरतों का सामना करने के लिये आपको चाहिये तैयारी की एक नयी रणनीति.

जी हाँ, आपको चाहिये तैयारी की एक नयी रणनीति

ऐसा मैं इसलिये कह रहा हूँ क्योंकि इस परीक्षा की तैयारी में न जाने कितनी नई चीज़ों से सामना होने जा रहा है, न जाने कितने नये विषयों को पढ़ना है, नई जानकारियों को तैयारी में शामिल करना है और इसके लिये कुछ नया सीखने को सदैव तत्पर रहना होगा.

कुछ पुरानी चीज़ों, पिछली आदतों को छोड़, कुछ नये और कुछ अभिनव दृष्टिकोण के साथ अपनी तैयारी को इस परीक्षा के मापदण्ड़ों के समकक्ष ले जाना होगा.

बदलाव का आलम यह है कि आजकल तो कई सफल उम्मीदवारों ने सिविल सेवा परीक्षा को पुस्तक रहित परीक्षा तक कह ड़ाला है. अब आप यह मत कह देना कि यह तो आपने पढ़ा ही नहीं या सुना ही नहीं.

यदि ऐसा है तो जान लें कि जो समाचार-पत्र, प्रतियोगिता पत्रिकाएँ और इंटरनेट पर जो भी आप पढ़ रहे हैं वह केवल ज्ञान ही दे रहीं हैं और तैयारी की रणनीति बनाने में कतई सहायक नहीं हैं.

इस कड़ी में तीसरे और अंतिम लेख में मैं चर्चा करूँगा सिविल सेवा परीक्षा के संदर्भ में ज्ञान वर्धन के महत्व और आपकी भाषा के प्रस्तुतिकरण पर प्रभाव की.

यह जीवन और यह लक्ष्य, आपका है और समय है उचित निर्णय लेने का

बार-बार प्रयास के बाद भी असफलता का मुह देख हताश हो दुराहे पर खड़े हो या तो हार मान लो या फिर अनमने ढ़ंग से एक बार फिर से तैयारी करते जाओ और निराशा में डूबे रहो. क्या यही सब है जिसके लिये आप अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्षों को दाँव पर लगा बैठे हैं ?

इन स्थितियों से तो अच्छा है कि तैयारी की योजना में परिवर्तन लायें. जल्दबाजी न दिखाये, सही रणनीति का निर्णारण करें, पढ़ाई के क्रम में निरंतरता बनाये रखें, उत्तर-लेखन अभ्यास करते रहें और सटीक तैयारी में जितना समय चाहिये, दें.

यदि आप प्रथम प्रयास में ही; या अपना अगला प्रयास लेते समय सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े सभी पहलुओं का ध्यान रखते हुए यदि आप तैयारी में भरपूर जान ड़ाल देंगे और प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाने के दृण निश्चय के साथ परीक्षा में भाग लेंगे, तो मान लें सफलता आपसे दूर नहीं.

 

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On Saturday 2nd June 2018     

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