Home / Indian Engineering Service Examination /

हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों को सफलता के लिये चाहिये केवल धैर्य, कठिन परीश्रम और सकारात्मक सोच, 337वाँ रैंक शैलेन्द्र सिंह इंदौलिया

(“For success, Hindi Medium candidates need only Persistence, hard work and positive thinking”, says 337th Rank Shailendra Singh Indolia)

बचपन से जिस स्वप्न को लिये बड़े हुए उसे केवल इस लिये छोड़ दिया जाये कि अब यह सिविल सेवा परीक्षा हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों के लिये कठिन हो चली है, यह तो कतई उचित निर्णय नहीं.

इन चुनौतियों का सामना कर सफलता प्राप्त करने का मजा ही अलग है और अपने इसी ज़ज्बे को दर्शाते हुए शैलेन्द्र सिंह इंदौलिया ने सिविल सेवा परीक्षा 2015 में शानदार सफलता पाई और 337वाँ रैंक प्राप्त कर भारतीय राजस्व सेवा में पद पाया है.


 By:      On Tuesday 7th March 2017

भरतपुर (ड़ीग) राजस्थान के शैलेन्द्र सिंह इंदौलिया ने अपने चौथा प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा 2015 में शानदार सफलता पाई और 337वें रैंक के साथ भारतीय राजस्व सेवा में पद पाया है.

शैलेन्द्र ने IIT-BHU से मैटेलर्जी से 2011 में बी.टेक किया और उसके बाद राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड़ विशाखापत्तनम में कार्यरत्त रहे.

अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित शैलेन्द्र ने चार प्रयासों में से तीन साक्षात्कार 2012, 2014 और 2015 दिये. पिछले प्रयासों में तो नहीं हुआ पर इस बार मैरिट-लिस्ट में अपना नाम पाने में सफल रहे.

सिविल सेवाओं की ओर आकर्षण के बारे में बताते हुए शैलेन्द्र ने कहा कि मेरा बचपन से ही स्वप्न रहा कि मैं सिविल सेवाओं में कैरियर बनाऊँ.

मेरी दादी जी आर्शीवाद देते हुए हमेशा कहतीं कि बेटा कलैक्टर बनना. फिर ग्रामीण पृष्ठभूमि से होने के कारण सिविल सेवकों का रोल सदैव दृष्टय रहा. पिता जी से जब-तब इस संबंध में जानकारियाँ मिलती रहीं और जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ तस्वीर साफ होती गई और जाने कब यह मेरे लिये लक्ष्य बन गया.SHAILENDRA-SINGH-INDOLIYA-ias-topper-upsc-cse-2015-337th-rank

हिन्दी माध्यम के चुनाव के बारे में स्पष्ट शैलेन्द्र ने बताया कि स्कूल तक मेरा माध्यम हिन्दी रहा जो मेरे मस्तिष्क पर छाई रहती है और बोल-चाल की भाषा भी है. मौलिक विचार, भावनायें, शब्दों पर नियंत्रण और अभिव्यक्ति जो हिन्दी द्वारा की जा सकती है वह अंग्रेजी में शायद बनावटी लगे. इसलिये सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने का निर्णय लेते हुए केवल हिन्दी माध्यम ही चुना.

अब यह सिविल सेवा परीक्षा हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों के लिये कठिन हो चली है, यह तो सिर्फ हमारा मानना है इसके पीछे तर्क-वितर्क करने सा कुछ प्राप्त तो होने से रहा.

हिन्दी माध्यम को ले पिछले कुछ समय से उत्पन्न नकारात्मक वातावरण के बारे में अपना मत रखते हुए शैलेन्द्र ने माना हाँ, पिछले कुछ वर्षों में हिन्दी माध्यम को ले कर स्थिति गम्भीर बनी हुई है और लोगों का मानना है कि हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों को कुछ कम अंक मिलते हैं.

यदि मैं अपने अंक देख इस बारे में टिप्पणी करूं तो शायद लगे कि मुझे भी वैकल्पिक विषय और साक्षात्कार में कम अंक मिले हैं पर इसका सकारात्मक पक्ष देखें तो सत्य यह है कि फिर भी चयन तो हो गया और केवल यही महत्वपूर्ण है.

इस परीक्षा में क्या आपके लिये काम कर जाता है यह सोच कर तैयारी करते समय समग्र रूप से पाठ्यक्रम को पूरा करने का उद्देश्य होना चाहिये.

"मेहनत का कोई विकल्प नहीं" यह कथन केवल हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों के लिये ही नहीं अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों के लिये भी समान रूप से सत्य है.

आपके समक्ष एक बड़ी चुनौती है और इसका सामना करने के लिये आपके पास केवल धैर्य, कठिन परीश्रम और सकारात्मक सोच के अलावा और कुछ नहीं.

इसमें कोई शक नहीं कि हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों के लिये स्तरीय और प्रामाणिक पाठ्य-सामग्री की उपलब्धता एक तरह से सीमित है. पर इसे बाधा समझ हम हाथ पर हाथ रख कर तो बैठ नहीं सकते. जब प्रण किया है कि अपना बेहतरीन प्रयास डालेंगे तो अंग्रजी में उपलब्ध सामग्री को उपयोग में लाते हुए तैयारी को आगे बढ़ायें.

हालांकि मैने कोचिंग संस्थान से मदद ली और टेस्ट-सीरीज़ भी की; पर उन पर निर्भर कभी नहीं रहा.

मैने अपनी तैयारी की नींव अपने प्रयासों से मज़बूत की और सफलता की कामना के साथ बस पथ पर चलता चला गया और अंततः लक्ष्य मिल ही गया.

अपनी तैयारी में उपयोग में लाये संसाधनों के बारे में शैलेन्द्र ने कहा, "मैं हमेशा तैयारी में प्रामाणिक संसाधनों को उपयोग में लाया. सरकारी रिपोर्टों, नीतियों और विभिन्न मंत्रालयों और स्रोतों से उपलब्ध आलेखों का भरपूर उपयोग किया. अधिकांश सामग्री हिन्दी में भी उपलब्ध रही जो नहीं मिली वह अंग्रेजी से पढ़ कर अपने नोट्स बना तैयारी की."

"जब आप किसी नई चीज को साखने का मन बनाते हैं तो प्रयास करते-करते आप सीख जाते हैं; इसी प्रकार अंग्रेजी के स्रोत से पढ़ कर अपने उपयोग के लिये सामग्री इक्कठ्ठा करते रहें और जल्द ही यह एक नियमित प्रक्रिया बन जायेगी जो आपकी पाठ्य-सामग्री संबंधी कठिनाईयों को दूर कर देगी."

Last Update Tuesday 7th March 2017

Write Comments

IASPassion.com ...Career