मेरे पिता मेरे आर्दश और मेरे प्रेरणा-स्रोत रहे, अंशुल कुमार (रेंक 293; सी.एस.ई. 2015)

MNNIT, इलाहाबाद से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में, B.Tech अंशुल कुमार ने सिविल सेवा परीक्षा 2015 में शानदार सफलता हासिल की है और उन्हें 293 रैंक मिला है. अंशुल का चयन इस वर्ष भारतीय वन सेवा (IFoS 2015) में भी हो गया था.

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कहते हैं कि जब आप सही रास्ते पकड़ लेते हैं और सफलता का स्पर्श पा लेते हैं, अकसर एक के बाद एक लक्ष्य भेदन होता जाता है और ठीक ऐसा ही कुछ अंशुल कुमार के साथ हुआ जहाँ उन्हें एक के बाद तो लगातार सफलता मिलती चली गईं; पहली, एस.एस.सी. आबकारी निरीक्षक 2014 में चुने गये, अगले भारतीय वन सेवा 2015 में अपने लिये जगह सुदृढ़ की और अब, प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में वांछित सफलता हासिल की और योग्यता सूची में 293 रैंक मिली है.

अपनी सफलता की गाथा और कैसे अपने पिता की इच्छा ने उनकी सफलता में सबसे अधिक योगदान दिया इस पर खुलासा करते हुए अंशुल ने कहा, "मेरा पैतृक स्थान कानपुर (उत्तर प्रदेश) है. मेरे स्वर्गीय दादा जी एक किसान थे; फिर भी, उन्होंने शिक्षा के महत्व को स्वीकारा और यह सुनिश्चित करने के लिए कि मेरे पिता की शिक्षा अच्छी तरह से पूरी हो जाये, बहुत मेहनत की. यहाँ तक कि शुरुआत में, मेरे पिता ने भी खेतों में मेहनत की; फिर, शिक्षित होने के कारण उन्हें एक सरकारी नौकरी मिल गई. वह ही मेरे आदर्श और प्रेरणा का स्रोत हैं"

"मेरे पिता बचपन से ही मुझे भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई.ए.एस.) में कैरियर बनाने के लिये प्रेरित करते रहे क्योंकि वह मेरे द्वारा अपने सपने को पूरा करना चाहते थे. दरअसल, मेरे पिता ने अपने लिए सिविल सेवा में कैरियर की कल्पना की थी और कलेक्टर बनना चाहते थे. शक्ति, प्रतिष्ठा और लाल बत्ती गाड़ी के साथ, वह जनता की सेवा करना चाहते थे लेकिन, वह ऐसा नहीं कर सके."

"सदैव मेरे पिता ने मुझे सिखाया है कि आपके लिये अपने विकास में निवेश करना ही सबसे अच्छा निवेश है. उसने मुझे एक लक्ष्य दे दिया और मेरी क्षमताओं के कारण उन्हें मुझ में पूर्ण विश्वास भी था. मैं जानता था कि मैं यह कर सकता हूँ और एक सटीक योजना के माध्यम से मुझे सफलता की राह ढ़ूढ़ना आसान रहेगा.

अपनी सफलता-योजना को साझा करते हुए अंशुल ने कहा, "सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के लिए सही सलाह और एक संरक्षक की जरूरत अवश्य है."

"एक संरक्षक या गाइड जीवन के हर चरण में महत्वपूर्ण है. जैसे घर पर अपने माता पिता हैं, स्कूल में अपने शिक्षक और नौकरी में अपने सहयोगियों या फिर मालिक भी हो सकता है. इसी तरह, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में वरिष्ठ जो पहले से ही तैयारी कर रहा हो मार्गदर्शन कर सके और उनकी गलतियों से सीखने के द्वारा तैयारी की मुश्किलों से बचने की राह दिखाये य़ा एक संरक्षक जो आपको इन मुश्किल चरणों में जरूरत के अनुरूप मदद करे और आपकी तैयारी को एक सही दिशा दे सके.

अंशुल को स्वीकार किया, "मैं वास्तव में भाग्यशाली रहा हूँ कुछ मित्रों से सहायता मिली और एक संरक्षक के रूप में खान सर (खान स्टड़ी ग्रुप, KSG) और प्रतियोगिता दर्पण की तरह की पत्रिकाओं द्वारा मूल्य संवर्धन मिला.

मेरे पिता उत्तर प्रदेश सरकार (श्रम विभाग, गाजियाबाद) के साथ काम कर रहे हैं और मेरी माँ एक ग्रहणी हैं. उनके प्यार और देखभाल ने मुझे इस स्थान तक पहुँचने में बड़ा योगदान दिया. मेरा एक भाई और एक बहन है; दोनों मेरे से बड़े हैं. मैं अपने परिवार द्वारा दिये गए प्यार और प्रोत्साहन के लिए सदैव आभारी रहूँगा, जिसने मुझे इस परीक्षा को पार करने के अपने संकल्प को मजबूत करने में मदद की.

Last Update Thursday 18th July 2019     

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