सिविल सेवा परीक्षा एक परीक्षा ही नहीं है; अब, इसके प्रति सामाजिक जुनून सा है; जसमीत सिंह संधू (रैंक 3; सीएसई 2015)

(Civil Services Examination is not an exam; now, it is a social obsession; says Jasmeet Singh Sandhu (AIR 3; CSE 2015))

जसमीत सिंह संधू, जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2015 में तीसरी रैंक हासिल की है के अनुसार सिविल सेवा परीक्षा के लिए क्रेज़ केवल उम्मीदवारों तक ही सीमित नहीं है; आपके परिवार वाले, दोस्त और करीबी लोग आपसे इस परीक्षा में शामिल होने तथा आपको सफल हो सुर्खियों में उभरने देखना चाहते हैं.


 By:      On Sunday 18th December 2016

अधिकांश युवा 'आई.ए.एस.' (भारतीय प्रशासनिक सेवा) बनने का एक लक्ष्य निर्धारित करते हैं और एक विशेष उद्देश्य के साथ सिविल सेवा परीक्षा के लिए तैयारी शुरू करते हैं जहाँ वे मन में एक सुखद अंत की कामना संजोते हैं.

लेकिन, यह इतना आसान नहीं है जितने वह मानते हैं. हर कोई अपने गंतव्य तक पहुंचने में सक्षम नहीं हो पाता है; यह तो केवल कुछ उम्मीदवार हैं जो इसे शीर्ष पद 'आई.ए.एस.' तक पहुँचने का मौका पाते हैं.

जसमीत सिंह संधू के मामले में पहले दो प्रयास लक्षय से दूर रहे. तीसरे प्रयास में उन्होंने सी.एस.ई. 2014 में सफलता तो प्राप्त की लेकिन योग्यता-सूची में 332 रैंक के साथ उन्हें भारतीय राजस्व सेवा (आई.आर.एस.- सी. एंड सी.ई.) मिली.

चौथे प्रयास के साथ जसमीत को एक आश्चर्य मिला - रैंक 3 जो 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' का पद सुनिश्चित करता है. जसमीत कहते हैं, "मैं एक अच्छा रैंक उम्मीद कर रहा था; लेकिन, शीर्ष तीन में नाम पाना वास्तव में संतोषजनक था."

जसमीत अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता सुरिंदर कौर और डॉ जे. एस. संधू, उपमहानिदेशक (फसल विज्ञान) आई.सी.ए.आर. को देते हैं और अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं विशेष रूप से मुकुल पाठक (मनोविज्ञान संकाय) को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए.

एक घटना का जिक्र करते हुए जसमीत ने कहा, "कुछ साल पहले मैंने कैट (CAT) परीक्षा दी और 99.4 पर्सेंटाइल मिला. लेकिन, परिवार में कोई नहीं है जिसने इसके बारे में पूछा भी हो; लेकिन, जब यह सिविल सेवा परीक्षा के बारे में था, मेरे पिता का उत्साह देखने लायाक रहा जिन्होंने मेरा फार्म तक भर दिया. इस तरह का ज़ुनून सा है इस परीक्षा के लिए.

वार्तालाप के बीच, अपने विचार व्यक्त करते हुए जसमीत की माँ कहती हैं, "जसमीत हमेशा एक के बाद एक उपलब्धियां में रहा है; लेकिन, तासरे रैंक के साथ इस सफलता ने इसे एक हीरो बना दिया है. उन्होंने कहा कि जसमीत आज समाचारों में है और यहां तक ​​कि दोस्त, रिश्तेदार सभी इसकी उपलब्धि के बारे में बात कर रहे हैं."

सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम से संतुष्ट, शांत भाव से जसमीत अपने विचार साझा करते हुए कहते हैं, "इस तरह की एक कठिन परीक्षा में हर एक सफलता की अपनी अलग कहानी है; रैंक की परवाह किए बगैर प्रत्येक सफलता का जश्न मनाया जाना चाहिए."

"सभी प्रतिभाशाली और योग्य हैं; कुछ इस प्रयास में शीर्ष रैंक पर कब्जा कर रहे हैं तो कुछ उम्मीदवार जो आज योग्यता-सूची में निचले पायदान पर हैं; उनमें से कई आने वाली परीक्षाओं में 'शीर्ष रेंक' प्राप्त करने में सक्षम हैं".

आप इस परीक्षा के बारे में विचार जानना चाहते हैं, तो आपको उन उम्मीदवारों तक पहुँचना चाहिए जो विफल रह जाते हैं. किसी भी परिणाम के सुनिश्चित नहीं होने पर भी यह उम्मीदवार अपनी किस्मत फिर से आजमाने की कोशिश करते हैं और युवावस्था के 5-6 साल इस परीक्षा के लिए तैयारी करने और किसी अप्रिय परिणाम के बाद फिर से कोशिश करने में बिताते हैं. 'शीर्ष रेंक पर सफल उम्मीदवारों को देख उन्हें प्रेरणा मिलती है तथा सफलता की आशा उन्हे इस परीक्षा से बाँधे रखती है.'

"गौरव अग्रवाल (रैंक 1, सी.एस.ई. 2013) जैसे सफल उम्मीदवारों ने मुझे भी मोहित किया और उनके व्यक्तित्व की एक गहरी छाप मेरी तैयारी पर पड़ी.

जसमीत कहते हैं, "मैं यह अच्छी तरह जानता था कि यह आसान नहीं है और हर कोई पहली रैंक नहीं पा सकता है या अपने पहले ही प्रयास में सफल हो सकता है. मेरी यात्रा के दौरान, मैंने भी बहुत सारी बाधाओं का सामना किया, लेकिन मेरा दृढ़ विश्वास ही था जिसने मुझे प्रयास लेते रहने के लिए और अंत में अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने में मेरी मदद की."

Last Update Sunday 18th December 2016

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