अपनी क्षमताओं के साथ ही अपनी सीमाओं का आकलन करें और तदनुसार तैयारी करें, संतोष कुमार राय (107वाँ रेंक, सिविल सेवा परीक्षा 2013 में हिंदी माध्यम से सफल)

(Assess your capabilities as well as your limitations and prepare accordingly, says Santosh Kumar Roy (Hindi Medium - AIR 107, CSE 2013))

हिन्दी माध्यम के उम्मीदवारों की उम्मीदों को जिंदा रखते हुए, संतोष कुमार राय ने सिविल सेवा परीक्षा 2013 में यह शानदार सफलता हासिल की है और योग्यता-सूची में 107वाँ रैंक हासिल किया है. यह उनका तीसरा प्रयास था.


 By:      On Sunday 18th December 2016           Read In English

ऐसे समय में जब लेखन-माध्यम हिन्दी के साथ सिविल सेवा परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों के गिरते परिणाम ने उम्मीदवारों के आत्मविश्वास को बुरी तरह से आघात पहुँचाया है, संतोष कुमार रॉय (रैंक 107) की सफलता की कहानी हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के बीच विश्वास पैदा करने के लिए पर्याप्त है.

मैं सिर्फ संतोष के शब्दों को प्रस्तुत कर रहा हूँ जो उनके मुख से निकले जब मैंने सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के बारे में बात की और जानना चाहा कि हिंदी माध्यम के साथ तैयार करते समय उन्होंने कैसा महसूस किया.

आई.ए.एस. बनने का तो मेरे बचपन का स्वप्न था; लेकिन, अब 30 साल की उम्र में ही मेरा सपना पूरा हो सका. मेरी कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है. यहाँ सब कुछ है - सपने, संघर्ष, कदम-दर-कदम लक्ष्य का ओर बढ़ना, कुछ तीर निशाने पर; तो कभी मायूसी और अंत में वांछित लक्ष्यों को पाने का सुखद अनुभव.

Santosh-Kumar-Roy-Hindi-medium-Topper-107th-Rankमैं ग्रामीण पृष्ठभूमि से संबंध रखता हूँ और अपर्याप्त संसाधनों के कारण जीवन में सुख-आराम की चीज़ों एवं उन्मुक्त वातावरण से वंचित ज़रूर रहा था ; लेकिन, किसी के सामने कभी नीचा महसूस नहीं किया और न ही किसी से कम. सदैव इस विश्वास के साथ जिन्दगी में आगे बड़ा हूँ कि भगवान ने जो सभी दिया गया है वह मुझे भी दिया है; अगर, कुछ कमी है भी तो वह सब पाने के लिए कठिन प्रयास करूँगा.

हम में से हर एक की कुछ शक्तियों और कमजोरियों है; मेरी मजबूत इच्छा शक्ति ही मेरा सबल पक्ष है और मैंने अपनी क्षमताओं को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया.

मुझे लगा कि जब सिविल सेवा परीक्षा में पाठ्यक्रम का स्तर स्नातक स्तर के समकक्ष है तो मुझे सफलता की संभावना के बारे में बहुत ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए. स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, मैंने महसूस किया कि मैं यह कर सकता हूँ और इस विचार के साथ ही मैंने सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के बारे में सोचा. मैंने हमेशा मानक पाठ्य-पुस्तकों में विश्वास रखा है और जो पढ़ा, सब समझने की कोशिश की न कि रटने में.

मैंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की शुरूआत इस आशा के साथ की कि केवल उच्च प्रयास ही मुझे वांच्छित लक्ष्य तक पहुँचा सकता है.

लेकिन, यह निर्णय इतना आसान नहीं था जितना मैं सोच रहा था; इस परीक्षा हेतु संसाधनों की कमी और इसके साथ जुड़ी अनिश्चितताओं ने मुझे इसके बारे में पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया. उस समय मैं असहाय था और कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण मुझे सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने की योजना को स्थगित करना पड़ा.

इस बीच में, 2007 में मेरी शादी हो गई और मेरी एक बेटी भी है अब 5 साल की हो गई है. मैंने अपने परिवार को पूरा समय दिया और बदले में, उनसे भी भरपूर प्यार, स्नेह और सबसे महत्वपूर्ण मानसिक शांति मिली जिस कारण एक बार फिर से मैं आगे की सोच रख पाया और अपनी नियती को पाने निकल पड़ा.

किसी भी अन्य युवा की तरह, मेरा भी पहला उद्देश्य जीवन में स्थिरता की खोज रही और निरंतर प्रयासों के साथ इसमें मुझे सफलता भी मिली और 2010 में मैं एस.एस.सी. (स्नातक स्तर) परीक्षा में चुना गया और सौभाग्य से केंद्रीय सचिवालय, नई दिल्ली में पोस्टिंग मिल गयी. ईश्वर की कृपा से सरकारी सेवा और शादी के बाद मैं जीवन में व्यक्तिगत परिस्थितियाँ भविष्य के सुख का दरवाज़ा खोलती नजर आयीं.

कहते हैं कि जब कुछ अच्छा होना होता है तो लगभग सभी बातें एक के बाद एक सही घटनी शुरू हो जाती हैं. इसी क्रम में मेरी पत्नी में इस परीक्षा के प्रति अधिक झुकाव था और उन्हें लगा कि मैं यह कर सकता हूँ. सिविल सेवा परीक्षा में प्रयास करने के लिए उन्होंने मुझे निरंतर प्रोत्साहित किया जिस कारण मैं अपने कैरियर गंतव्य के बारे में गंभीर हो गया.

दिल्ली, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए केंद्र रहा है, और यहाँ मुझे सब मिल गया जिसकी मुझे अपनी तैयारी की योजना के अनुरूप जरूरत थी. पुस्तकें, अध्ययन सामग्री, मार्गदर्शन, और सही सलाह – जिन सब ने मेरी सफलता में बहुत योगदान दिया है.

सिविल सेवा परीक्षा 2011 में पहले प्रयास में मैंने प्रारंभिक परीक्षा पास की लेकिन, आगे नहीं जा सका. सिविल सेवा परीक्षा 2012 में पिछले प्रयास में मुझे 665वाँ रैंक मिला और भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) मिल गयी और अब, तीसरे प्रयास में, आई.ए.एस. का पद पाने की आशा से बड़ी राहत महसूस कर रहा हूँ.

Last Update Sunday 18th December 2016

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