वर्तमान परीक्षा की योजना के बारे में एक छोटा सा परिचय

सिविल सेवा में चयन प्रक्रिया एक कठोर परीक्षा प्रक्रिया पर आधारित है और सिविल सेवा परीक्षा हर साल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित की जाती है.

यह परीक्षा दो चरणों में आयोजित की जाती है - प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा (लिखित और साक्षात्कार) .

प्रारंभिक परीक्षा:

प्रारंभिक परीक्षा एक प्राक्चयन परीक्षण है और इसका  उद्देश्य  मुख्य परीक्षा में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों के चयन करना है. प्रारंभिक परीक्षा के लिए सिविल सेवा एप्टीट्यूड टेस्ट (CSAT) की शुरूआत के साथ सिविल सेवा परीक्षा 2011  से कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन आये हैं.

पूर्व में भी 2007 परीक्षा से नकारात्मक अंकन प्रारंभिक परीक्षा में शुरू किया गया.  परीक्षा लेने उम्मीदवारों को प्रश्न-पत्र सावधानीपूर्वक हल करने चाहिए क्योंकि वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न पत्र में  उम्मीदवार द्वारा  हर गलत जवाब के लिए चिह्नित दंड (नकारात्मक अंकन) है.

मुख्य परीक्षा में प्रवेश हेतु अहर्ता प्राप्त करने वाले उम्मीदवार द्वारा प्रारंभिक परीक्षा में प्राप्त अंकों को उनके अतिंम योग्यता क्रम को निर्धारित करने के लिेए नहीं गिना जाता है.

मुख्य परीक्षा (लिखित):

लिखित परीक्षा में मुख्य परीक्षा की रूपरेखा में दिये गए विषयों में पारंपरागत निबंधात्मक शैली के 9 प्रश्न-पत्र शामिल होंगे.

जो उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिखित भाग में उतने न्यूनतम अर्हक अंक प्राप्त कर लेगा जितने आयोग अपने निर्णय से निश्चित करे उन्हे आयोग व्यक्तित्व परीक्षण के लिए बुलाएगा.

किन्तु, भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी के प्रश्न-पत्रों में केवल अर्हता प्राप्त करनी होगी. इन प्रश्न-पत्रों में प्राप्त अंकों को योग्यता क्रम निर्धारित करने में गिना नहीं जाएगा.

साक्षात्कार के लिए बुलाया जाने वाले उम्मीदवारों की संख्या भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या से लगभग दुगनी होगी.

साक्षात्कार:

परीक्षा योजना के अंतिम चरण साक्षात्कार के लिए मुख्य परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को आमंत्रित किया जाता है जो संघ लोक सेवा आयोग के कार्यालय में दिल्ली में प्रत्येक वर्ष मार्च-अप्रैल के महीने के दौरान आयोजित किये जाते हैं.

साक्षात्कार के लिए 300 अंक होते हैं (कोई न्यूनतम अर्हक अंक नहीं है).

इस प्रकार उम्मीदवारों द्वारा मुख्य परीक्षा (लिखित भाग तथा साक्षात्कार) में प्राप्त किए गए अंकों के आधार पर उनका अंतिम क्रम निर्धारित किया जाता है.
परीक्षा में उम्मीदवारों की स्थिति तथा विभिन्न सेवाओं और पदों के लिए उनके द्वारा दिये गये वरीयता क्रम को ध्यान में रखते हुए उन्हे विभिन्न सेवाओ में आवंटित किया जाता है.

Last Update Sunday 19th April 2015     

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