'Backbenchers' ने मेरी सफलता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, अजीत 26 वें रैंक पर चयनित

मध्य प्रदेश कैडर के एक आई.पी.एस. अधिकारी अजीत ने सिविल सेवा परीक्षा 2012 में 26 वां रैंक हासिल किया है. अपने कार्य सम्बन्धी प्रतिबद्धता के कारण उन्हें तैयार करने के लिए समय नहीं मिल पाया, इसलिए उन्होंने अपने पुराने नोट्स और दोस्तों के एक समूह 'Backbenchers' द्वारा तैयार नए नोट्स पर ही भरोसा किया.

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एक लड़के के लिए, जिसने छह साल की उम्र में ही अपने पिता को खो दिया था, उसके लिए देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं तक पहुचने की यात्रा कोई आसन नहीं थी. पहले, उसके नाना और बाद में, उसकी मां प्रमिला रॉय को कई बलिदान करने पड़े और उन्होंने अथक प्रयास कर यह सुनिश्चित किया कि वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर ले. साथ ही पूरा परिवार भी इस मिशन के दौरान चट्टान के रूप में उसके साथ खड़ा था.

सभी कठिनाइयों के बावजूद, उसने भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अभियान जारी रखा और जब वह जे.एन.यू., नई दिल्ली में अर्थशास्त्र में मास्टर्स कर रहा था, उसने भारतीय प्रशासनिक सेवा में कैरियर बनाने के लिए सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने का फैसला किया.ajit-ias-topper-26th-rank-cse-2012

यह कहानी है अजीत की जिन्होंने इस उत्कृष्ट परिणाम के साथ सिविल सेवा परीक्षा 2012 में 26 वां रैंक हासिल किया है. उन्होंने पुलिस सेवा में कार्यरत होने के बावजूद यह शानदार सफलता हासिल की है.

अपनी सफलता यात्रा के बारे में बताते हुए अजीत कहते हैं कि "पहले प्रयास में मैंने मुख्य परीक्षा लिखी, लेकिन, साक्षात्कार तक नहीं पहुँच सका. अपने दूसरे प्रयास में, मुझे सफलता मिली और मैंने 97 वीं रैंक (CSE 2009) प्राप्त की, जिसके द्वारा मेरा चयन भारतीय पुलिस सेवा में हुआ. आज भी मैं आईपीएस अधिकारी (मध्य प्रदेश कैडर) के रूप में कार्य कर रहा हूँ.

अजीत कहते हैं कि 'IAS' पद निरंतर मेरे लक्ष्य के रूप में सामने रहा पर तीसरे प्रयास में, कुछ भटकाव और खराब स्वास्थ्य की वजह से सफलता तो फिर से मिली, पर 462 वाँ रैंक मिला. लेकिन, अंततः मेरा चौथा प्रयास मेरे लिए भाग्यशाली साबित हुआ."

IAS के पद के लिए प्रयास करने के कारणों पर टिप्पणी करते हुए अजीत कहते हैं कि "दुनिया में कोई अन्य कार्य इतनी कम उम्र में इतना बड़ा मंच प्रदान नहीं करता है. एक युवा और गतिशील अधिकारी के रूप में किसी एक जिले या एक विभाग में काम कर के आप लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं."

अजीत ने पिछली घटनाओं को याद करते हुए कहा कि "यह आसान नहीं था. इस बार मैंने मुख्य परीक्षा से सिर्फ 20 दिन पहले ही परीक्षा लिखने का फैसला लिया जो अक्टूबर 2012 के पहले सप्ताह में शुरू हो रही थीं. मुझे केवल 12 दिनों का अवकाश मिल पाया और इस छोटे से समय में तैयारी, एक बड़ी चुनौती थी. मैंने सिर्फ अपने दोस्तों अमर गहलोत, अवनीश, राजीव, संजय वैश्य, और योगेन्द्र सिंह के द्वारा बनाये गए नोट्स और अपने पुराने नोट्स पर ही भरोसा किया."

अजीत भावुक हो कहते हैं कि "हम मित्रों का एक छोटा सा समूह है जिसे हम 'backbenchers' के नाम से संबोधित करते हैं. हम सभी सहयोग और तालमेल के साथ एक दूसरे की मदद करते हैं और, अब तो उच्च परिणाम देने में भी भूमिका निभा रहें हैं."

साथ ही, अजीत अपनी पत्नी रिजुला ​​उनियाल (AIR 231, CSE 2010; भारतीय राजस्व सेवा में कार्यरत) को भी आभार व्यक्त करते हैं जिनके साथ उन्होंने संयुक्त रूप से सिविल सेवा परीक्षा में प्रदर्शित करने का सचेत निर्णय लिया था. तैयारी के दौरान मिली उनकी सहायता और समर्थन के साथ सभी मुश्किलों को अजीत आसानी से झेल पाए.

जनता की सेवा करने के लिए उनकी उत्सुकता उनके शब्दों में प्रतिबिंबित होती है. अजीत कहते हैं कि "अपनी प्रतिभा, नवाचार कौशल, और कड़ी मेहनत से अपने देशवासियों और खासकर महिलाओं के जीवन में बहुत सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है, यह अत्यंत संतोषजनक भी है."

Last Update Thursday 18th July 2019     

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